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Culture

राजस्थान की लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक परम्पराएँ

29 अप्रैल 2025 · 10 min read

RajStudy TeamRAS Prelims Experts

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Published: 10 min readCategory: Culture

राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत

राजस्थान अपनी विविध और समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ की लोक कला, संगीत और नृत्य शैलियाँ भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग हैं।

लोक नृत्य

  • घूमर: राजस्थान का राज्य नृत्य; महिलाओं द्वारा; गोलाकार लहराती गति — UNESCO सांस्कृतिक धरोहर (2016)।
  • कालबेलिया: सपेरा समुदाय का नृत्य — UNESCO अमूर्त धरोहर (2010); गुलाबो सपेरा प्रसिद्ध कलाकार।
  • भवाई: सिर पर मटके रखकर नृत्य; अलवर-भरतपुर क्षेत्र।
  • तेरहताली: कामड़ जाति की महिलाएँ; शरीर पर 13 मंजीरे बाँधकर नृत्य।
  • गैर: भील जनजाति; होली पर्व पर; मेवाड़ क्षेत्र।
  • चरी नृत्य: किशनगढ़; महिलाएँ सिर पर जलती चरी रखकर।
  • डांडिया: मारवाड़ क्षेत्र; नवरात्रि पर।

लोक संगीत और वाद्य यंत्र

  • माँड: राजस्थान की शास्त्रीय लोक गायन शैली; केसरिया बालम प्रसिद्ध गीत।
  • पाबूजी की फड़: भोपा जाति द्वारा रात्रि को फड़ चित्र के सामने गायन।
  • लंगा-माँगणियार: पश्चिमी राजस्थान के पेशेवर लोकगायक; विश्वप्रसिद्ध।
  • प्रमुख वाद्य यंत्र: रावणहत्था (सबसे प्राचीन वाद्य), सारंगी, कामायचा, मोरचंग, अलगोजा (दोहरी बाँसुरी), नड़, ढोल, नगाड़ा, मशक।

हस्तशिल्प

  • ब्लू पॉटरी: जयपुर — GI Tag प्राप्त; फारसी-चीनी तकनीक।
  • बागरू और सांगानेर की छपाई: प्राकृतिक रंगों से कपड़ा प्रिंटिंग — GI Tag।
  • कठपुतली: राजस्थान की पारम्परिक कला; UNESCO अमूर्त धरोहर सूची में।
  • मीनाकारी: जयपुर — धातु पर रंगीन तामचीनी का काम।
  • थेवा कला: प्रतापगढ़ — काँच पर सोने का अलंकरण।
  • मोलेला की मूर्तिकला: राजसमंद — टेराकोटा; GI Tag।

प्रमुख मेले और त्योहार

  • पुष्कर मेला: कार्तिक पूर्णिमा; ऊँट व्यापार; विश्वप्रसिद्ध।
  • बेणेश्वर मेला: डूँगरपुर; माघ पूर्णिमा; आदिवासियों का कुंभ।
  • तीज: जयपुर; श्रावण; महिलाओं का पर्व।
  • गणगौर: राजस्थान का सबसे बड़ा महिला पर्व; चैत्र में।
  • जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: विश्व का सबसे बड़ा साहित्य उत्सव।

चित्रकला शैलियाँ

  • मेवाड़ शैली: उदयपुर — चटकीले रंग, मोटी रेखाएँ।
  • मारवाड़ शैली: जोधपुर — पीले और लाल रंगों की प्रधानता।
  • किशनगढ़ शैली: लम्बी आँखें, नुकीली नाक; बणी-ठणी (भारत की मोनालिसा)।
  • ढूँढाड़ शैली: जयपुर — मुगल प्रभाव।
  • बूँदी-कोटा शैली: शिकार दृश्य और पशु-पक्षी चित्रण।

RAS परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • घूमर और कालबेलिया UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में।
  • पाबूजी की फड़ — राजस्थान की सबसे बड़ी चित्रित लोक कला।
  • बणी-ठणी — किशनगढ़ शैली की प्रमुख कृति; 1973 में डाक टिकट जारी।
  • राजस्थान दिवस: 30 मार्च।
  • राजस्थान का राजकीय नृत्य: घूमर।
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