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📚 राजस्थान की अर्थव्यवस्था

पर्यावरण और राजस्थान की अर्थव्यवस्था - RPSC RAS परीक्षा अध्ययन मार्गदर्शन

Environment - Macro Economic Overview: Economy of Rajasthan (RPSC RAS Exam Guide)

12 मिनटadvanced· Economy of Rajasthan

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

पर्यावरण (Environment) राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। RPSC RAS परीक्षा में अर्थव्यवस्था के सूक्ष्म आर्थिक दृष्टिकोण के अंतर्गत पर्यावरणीय कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजस्थान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), कृषि, पशुपालन, खनन, पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र सभी पर्यावरणीय परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं।

राजस्थान एक अर्ध-शुष्क जलवायु वाला राज्य है जहां कम वर्षा, उच्च तापमान और मरुस्थलीय परिस्थितियां व्याप्त हैं। इन परिस्थितियों ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को विशेष रूप प्रभावित किया है। RPSC RAS परीक्षा के प्रथम और द्वितीय प्रश्नपत्र दोनों में पर्यावरणीय अर्थशास्त्र के प्रश्न पूछे जाते हैं।

मुख्य अवधारणाएं

१. जलवायु और आर्थिक विकास

राजस्थान की जलवायु मुख्यतः उष्ण और शुष्क है। राज्य का अधिकांश भाग थार मरुस्थल के अंतर्गत आता है। यहाँ की वार्षिक वर्षा दक्षिणपूर्व मानसून से होती है, जो अपर्याप्त और अनियमित होती है। पश्चिम में जैसलमेर में औसत वर्षा मात्र १५ सेमी है, जबकि दक्षिणपूर्व में बांसवाड़ा में यह १६० सेमी तक होती है। इस जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण कृषि उत्पादन भी अनिश्चित रहता है। राजस्थान की कुल कार्य बल का लगभग ३० प्रतिशत कृषि पर निर्भर है, लेकिन सूखा और जल की कमी के कारण कृषि आय अस्थिर रहती है।

२. जल संसाधन और आर्थिक गतिविधियां

जल राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। राज्य में भूजल का अधिकांश दोहन हो रहा है। इंदिरा गांधी नहर, चंबल नदी प्रणाली और अन्य सिंचाई परियोजनाएं कृषि उत्पादन में वृद्धि करती हैं। हालांकि, अनियमित बारिश के कारण जल संकट एक स्थायी समस्या बना हुआ है। जल संरक्षण के अभाव में राजस्थान के आर्थिक विकास में बाधा आती है।

३. वनस्पति और जैव विविधता

राजस्थान की कुल भूमि का लगभग १० प्रतिशत वन क्षेत्र है। दक्षिणपूर्वी भाग में उष्णकटिबंधीय सूखे पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जबकि पश्चिमी भाग में थार की वनस्पति पाई जाती है। ये वन राजस्थान की अर्थव्यवस्था में लकड़ी, औषधीय पौधे, पशु चारा और अन्य वन उत्पाद प्रदान करते हैं। वनों का संरक्षण पर्यटन और जीवन पद्धति को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।

४. खनिज संसाधन और पर्यावरण

राजस्थान में तांबा, जस्ता, चूना पत्थर, संगमरमर, लोहा अयस्क और अन्य खनिजों का विशाल भंडार है। खनन गतिविधियां राज्य के GDP में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, किंतु ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती हैं। खनन से मिट्टी का क्षरण, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण होता है। इसलिए, सतत खनन प्रथाओं को अपनाना आवश्यक है।

५. ऊर्जा और नवीकरणीय संसाधन

राजस्थान भारत का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक है। राज्य में सौर ऊर्जा की भी अपार संभावनाएं हैं क्योंकि यहां पूरे वर्ष प्रचुर सूर्य प्रकाश मिलता है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत राजस्थान की अर्थव्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

वर्षा: राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा ५७.५ सेमी है, जो भारतीय औसत (११७ सेमी) से कम है।

तापमान: ग्रीष्मकाल में तापमान ४०-५०°C तक पहुंच जाता है, जबकि शीतकाल में ०-१०°C हो जाता है।

थार मरुस्थल: राजस्थान के पश्चिमी भाग का अधिकांश हिस्सा थार मरुस्थल का अंग है, जो लगभग ९६,००० वर्ग किमी में विस्तृत है।

जलोढ़ क्षेत्र: उत्तरी राजस्थान में सिंधु-गंगा के मैदान हैं जहां जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।

वन आवरण: राजस्थान में लगभग २.३३ मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र है।

वन्य जीवन: राजस्थान में रणथंभौर, सरिस्का, केवलादेव घना जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य हैं।

राजस्थान विशेष

पर्यावरणीय चुनौतियां: राजस्थान को मुख्यतः सूखा, भूमि क्षरण, बंजर भूमि की समस्या और भूजल की कमी का सामना करना पड़ता है। राज्य में रेगिस्तान का विस्तार हो रहा है, जिसे वनीकरण कार्यक्रमों से रोका जा रहा है।

सूखा प्रबंधन: राजस्थान सरकार ने सूखा राहत के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) राज्य में व्यापक रूप से लागू की गई है।

जल संरक्षण परियोजनाएं: इंदिरा गांधी नहर, चंबल नदी परियोजना और अन्य जल विकास योजनाएं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा: राजस्थान का जैसलमेर जिला पवन ऊर्जा में अग्रणी है। खिमोली और भाद्रा में विश्व के सबसे बड़े पवन फार्म स्थित हैं।

पर्यटन और पर्यावरण: राजस्थान का पर्यटन उद्योग पर्यावरणीय सुंदरता पर आश्रित है। ताज, राज महलें, झीलें और वन्यजीव अभयारण्य प्रमुख पर्यटन आकर्षण हैं।

परीक्षा पैटर्न

प्रथम प्रश्नपत्र: सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान में पर्यावरण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें जलवायु, वनस्पति, वन्यजीवन और मिट्टी के प्रकारों से प्रश्न हो सकते हैं।

द्वितीय प्रश्नपत्र: सामान्य अध्ययन में राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर दिया जाता है। यहां पर्यावरणीय कारकों का आर्थिक विकास पर प्रभाव पूछा जाता है।

प्रश्न प्रारूप: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), अति लघु उत्तरीय (1-2 शब्द) और लघु उत्तरीय (50-100 शब्द) प्रश्न पूछे जाते हैं।

महत्वपूर्ण विषय: जलवायु परिवर्तन, जल संकट, वन संरक्षण, मरुस्थलीकरण, जीवाश्म ईंधन बनाम नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण का संबंध।

स्मरण युक्तियां

"वर्षा-जल-खेती" नियम: राजस्थान में वर्षा कम है → जल की कमी है → कृषि पर दबाव है। इस संबंध को याद रखें।

"पश्चिम में सूखा, दक्षिणपूर्व में हरियाली": राजस्थान के पश्चिमी भाग में कम वर्षा (जैसलमेर में १५ सेमी), जबकि दक्षिणपूर्व में अधिक वर्षा (बांसवाड़ा में १६० सेमी)।

"थार मरुस्थल = खनन + पशुपालन + कृषि": थार क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इन तीन गतिविधियों पर आधारित है।

"नदियां = जीवन रक्त": चंबल, बनास, कोटा, लूनी आदि नदियां आर्थिक विकास के केंद्र हैं।

संख्यात्मक स्मरण: राजस्थान का वन आवरण २.३३ मिलियन हेक्टेयर, औसत वर्षा ५७.५ सेमी, जलवायु क्षेत्र मुख्यतः अर्ध-शुष्क।

"E4N" याद रखें: Energy (ऊर्जा - पवन, सौर), Environment (पर्यावरण), Economy (अर्थव्यवस्था), New (नई योजनाएं)।

मानचित्र आधारित स्मरण: राजस्थान के मानचित्र पर मुख्य नदियां, वन क्षेत्र, खनन क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्यों को चिह्नित करें।

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