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📚 राजस्थान की अर्थव्यवस्था

पानी - राजस्थान की अर्थव्यवस्था में जल का महत्व: RPSC RAS परीक्षा अध्ययन पुस्तिका

Water: Macro Economic Overview - Economy of Rajasthan

12 मिनटintermediate· Economy of Rajasthan

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

पानी अथवा जल राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण संसाधन है। RPSC RAS परीक्षा के मैक्रो इकोनॉमिक्स अवलोकन खंड में जल संसाधन, उनका प्रबंधन और राजस्थान की अर्थव्यवस्था में जल की भूमिका एक महत्वपूर्ण विषय है। राजस्थान भारत का सबसे शुष्क राज्य है, जहां वार्षिक वर्षा मात्र २५० मिमी है। इस परिस्थिति में जल प्रबंधन न केवल कृषि के लिए बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अत्यावश्यक है। परीक्षा में जल संसाधनों के विकास, सिंचाई परियोजनाओं, भूजल दोहन, जल संरक्षण नीतियों और जल से संबंधित सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

मुख्य अवधारणाएं

१. जल संसाधन और उपलब्धता का अर्थशास्त्र

राजस्थान में जल की उपलब्धता अत्यंत सीमित है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से लगभग ६० प्रतिशत सूखा प्रवण क्षेत्र है। जल संसाधन प्रबंधन का आर्थिक दृष्टिकोण यह है कि सीमित जल को विभिन्न क्षेत्रों में कुशलतापूर्वक वितरित किया जाए। कृषि क्षेत्र में लगभग ९० प्रतिशत जल का उपयोग होता है, जबकि औद्योगिक और घरेलू उपयोग के लिए मात्र १० प्रतिशत उपलब्ध होता है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था में जल की कमी एक संरचनात्मक समस्या है जो दीर्घकालीन विकास को प्रभावित करती है।

२. सिंचाई परियोजनाएं और पूंजीगत निवेश

राजस्थान में बड़ी सिंचाई परियोजनाएं अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGP), चंबल घाटी परियोजना, माही बजाज सागर परियोजना और राणा प्रताप सागर परियोजना राज्य की प्रमुख परियोजनाएं हैं। ये परियोजनाएं न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाती हैं बल्कि बिजली उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी योगदान देती हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान के उत्तरी और पश्चिमी भागों में ९.५ मिलियन हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती है।

३. भूजल दोहन और धारणीयता

राजस्थान में भूजल का अत्यधिक दोहन एक गंभीर समस्या है। राज्य में ३३ जिलों में से १८ जिले अत्यधिक भूजल दोहन वाले क्षेत्र हैं। जैसलमेर, बीकानेर और पाली जिलों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। अर्थशास्त्र की दृष्टि से, भूजल एक सीमित संसाधन है और इसका अत्यधिक दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहा है। जल संरक्षण और पुनर्भरण परियोजनाएं न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक हैं बल्कि दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए भी अपरिहार्य हैं।

४. जल मूल्य निर्धारण और आर्थिक नीतियां

जल का मूल्य निर्धारण राजस्थान की आर्थिक नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार द्वारा कृषकों को सिंचाई जल बहुत कम दरों पर प्रदान किया जाता है, जिससे जल की बर्बादी होती है। राजस्थान जल संसाधन विभाग ने जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई हैं। ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जल के सही मूल्य निर्धारण से कृषि दक्षता बढ़ेगी और जल का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित होगा।

५. जल और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन राजस्थान में वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। अनियमित वर्षा, बढ़ता तापमान और सूखे की आवृत्ति बढ़ रही है। यह अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। कृषि उत्पादन अनिश्चित हो गया है, जिससे ग्रामीण आय प्रभावित हुई है। जलवायु-लचीली कृषि प्रणालियों के विकास, जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और वैकल्पिक आजीविका विकल्प सूखे से निपटने के आर्थिक उपाय हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

• राजस्थान की वार्षिक वर्षा: २५० मिमी (अखिल भारतीय औसत ११५० मिमी से बहुत कम)

• राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्र: ३,४२,२३९ वर्ग किमी (भारत का १०.४% क्षेत्र)

• सिंचित क्षेत्र: कुल कृषि क्षेत्र का लगभग ३५-४०%

• इंदिरा गांधी नहर परियोजना की कुल लंबाई: ६४५ किमी

• राजस्थान के प्रमुख नदी: राम, लूणी, घग्घर, चंबल, माही

• हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर उत्पादन में राजस्थान का महत्वपूर्ण योगदान

• वर्षा जल संचयन अभियान (जलभराव संचयन) सरकार की प्रमुख नीति

राजस्थान विशेष

राजस्थान के विभिन्न भागों में जल की स्थिति भिन्न है। पूर्वी राजस्थान, विशेषकर चंबल घाटी क्षेत्र में जल की अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति है। मध्य राजस्थान में बेड़च, कोटा और अन्य नदियों से जल उपलब्ध है। परंतु पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर) में जल की अत्यंत कमी है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने पश्चिमी राजस्थान के विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। यह परियोजना पंजाब से जल लाती है और राजस्थान के करीब २० लाख लोगों को जल आपूर्ति करती है। कृषि उत्पादन में आई वृद्धि से इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि, सतत विकास के लिए जल संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में जल से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित तरीकों से पूछे जाते हैं:

प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary): वस्तुनिष्ठ प्रश्न जल संसाधनों, सिंचाई परियोजनाओं के नाम, नदियों के बेसिन, भूजल के बारे में पूछे जाते हैं। साधारणतः २-३ प्रश्न होते हैं।

मुख्य परीक्षा (Mains): वर्णनात्मक प्रश्नों में जल प्रबंधन नीति, सूखे से निपटने की रणनीति, जल संरक्षण के उपाय और अर्थव्यवस्था पर जल के प्रभाव के बारे में विस्तृत उत्तर की अपेक्षा की जाती है। आमतौर पर १ पूर्ण प्रश्न होता है।

साक्षात्कार (Interview): जल समस्याओं के समाधान और राजस्थान के विकास में जल की भूमिका पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

स्मरण युक्तियां

१. "सीमा": राजस्थान की जल स्थिति को याद रखने के लिए "सीमा" शब्द का प्रयोग करें - ूखा-प्रवण क्षेत्र (६०%), गीपी परियोजना (मुख्य), ाही-चंबल (नदियां), वश्यकता (संरक्षण की)।

२. मुख्य परियोजनाएं: "चाईएम" - ंबल, ईजीपी (इंदिरा गांधी), राण (आहार), ाही बजाज।

३. नदियां: "राघचमा" - राम, ग्घर, ंबल, ाही, ए (आदि)।

४. संख्याएं याद रखें: २५० मिमी (वर्षा), ९०% (कृषि में जल उपयोग), ३.४२ लाख वर्ग किमी (क्षेत्र)।

५. जल प्रबंधन के तीन स्तंभ: "संसंर" - संचयन (Harvesting), संरक्षण (Conservation), िचार्ज (Recharge)।

६. दृष्टांत का प्रयोग: इंदिरा गांधी नहर परियोजना को "हरित क्रांति का संदेशवाहक" कहते हुए याद रखें, जिसने पश्चिमी राजस्थान को संपन्न बनाया।

७. समसामयिक विषय: जल की कमी, सूखा, बाढ़ प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषकों की समस्याओं को एक-दूसरे से जोड़कर याद रखें।

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