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उपाध्यक्ष - RPSC RAS परीक्षा के लिए संपूर्ण अध्ययन गाइड

Vice President - Indian Constitution Study Guide for RPSC RAS Exam

12 मिनटintermediate· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

भारतीय संविधान के अनुसार उपाध्यक्ष (Vice President) देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। यह पद राष्ट्रपति के बाद आता है और राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। RPSC RAS परीक्षा में उपाध्यक्ष से संबंधित प्रश्न संविधान खंड में नियमित रूप से पूछे जाते हैं। यह विषय राजनीतिक प्रणाली, संविधानिक पद और शक्तियों के वितरण को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपाध्यक्ष का पद भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यह विधायिका और कार्यपालिका दोनों से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अस्थायी राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है। परीक्षा की तैयारी के दौरान इस पद की संरचना, योग्यता, चुनाव प्रक्रिया और कार्यों को विस्तार से समझना आवश्यक है।

मुख्य अवधारणाएं

उपाध्यक्ष की परिभाषा और संवैधानिक स्थिति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपाध्यक्ष होगा। उपाध्यक्ष को संविधान में "Vice President" कहा गया है। यह एक संवैधानिक पद है जो राज्यसभा का पदेन सभापति (Chairman) होता है। उपाध्यक्ष की शक्तियां और कार्य संविधान द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। संविधान के भाग V में अनुच्छेद 63 से 71 तक उपाध्यक्ष से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

उपाध्यक्ष की योग्यताएं

उपाध्यक्ष के लिए अनुच्छेद 65 में निर्धारित योग्यताएं इस प्रकार हैं: वह भारत का नागरिक होना चाहिए। आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए। राज्यसभा का सदस्य होने के लिए योग्य होना चाहिए। उसे किसी सरकार के अधीन किसी लाभकारी पद पर नहीं होना चाहिए। ये योग्यताएं परीक्षा में बार-बार पूछी जाती हैं और सभी को याद रखना आवश्यक है।

उपाध्यक्ष का चुनाव

उपाध्यक्ष का चुनाव एक अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) प्रक्रिया द्वारा होता है। संसद के दोनों सदनों के सदस्य एक एकल संचयी मतदान (Single Transferable Vote) प्रणाली के द्वारा उपाध्यक्ष का चुनाव करते हैं। यह चुनाव प्रक्रिया राष्ट्रपति के चुनाव से भिन्न है। उपाध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। वह अपने से पूर्व के कार्यकाल की पूर्ति के बाद पुनः चुना जा सकता है। वह किसी भी समय अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है।

उपाध्यक्ष की शक्तियां और कार्य

उपाध्यक्ष की प्रमुख शक्तियां और कार्य निम्नलिखित हैं: राज्यसभा का पदेन सभापति होना उपाध्यक्ष का मुख्य कार्य है। राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, मृत्यु या त्यागपत्र की स्थिति में अस्थायी राष्ट्रपति (Acting President) के रूप में कार्य करता है। संविधान संशोधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्यसभा के संचालन में संवैधानिक प्रणाली को बनाए रखता है।

उपाध्यक्ष का निष्कासन

अनुच्छेद 67 में उपाध्यक्ष के निष्कासन की प्रक्रिया दी गई है। उपाध्यक्ष को राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या के कम से कम छः माह की पूर्व सूचना के साथ एक प्रस्ताव द्वारा निष्कासित किया जा सकता है। यह प्रस्ताव लोकसभा में अपनाया जाना चाहिए। निष्कासन की प्रक्रिया में राष्ट्रपति का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यह विधायिका का एक विशुद्ध कार्य है। अब तक भारत में किसी भी उपाध्यक्ष को निष्कासित नहीं किया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

भारत के प्रथम उपाध्यक्ष: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1952-1962) भारत के प्रथम उपाध्यक्ष थे। वे बाद में भारत के राष्ट्रपति भी बने। इनका कार्यकाल दो बार पूरा हुआ।

संविधान में संदर्भ: अनुच्छेद 63 से 71 तक उपाध्यक्ष से संबंधित प्रावधान हैं। संविधान का भाग V कार्यपालिका से संबंधित है जिसमें उपाध्यक्ष का स्थान है।

राज्यसभा की भूमिका: उपाध्यक्ष राज्यसभा का पदेन सभापति है। राज्यसभा में 245 सदस्य होते हैं जिनमें 238 निर्वाचित और 12 मनोनीत सदस्य होते हैं। उपाध्यक्ष इस सदन का अध्यक्ष होता है।

कार्यकाल: उपाध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। वह अपनी पद की समाप्ति से पहले पुनः निर्वाचित हो सकता है। कोई आयु सीमा नहीं है पुनः निर्वाचन के लिए।

वेतन और सुविधाएं: उपाध्यक्ष को प्रतिमाह वेतन और विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसे संसद में निर्धारित किया जाता है।

राजस्थान विशेष

राजस्थान की संदर्भ में उपाध्यक्ष का महत्व यह है कि राजस्थान के प्रतिनिधि संसद में भाग लेते हैं और उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान करते हैं। राजस्थान से अब तक दो मुख्यमंत्री राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख पद प्राप्त किए हैं। राजस्थान का राजनीतिक इतिहास भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है।

RPSC RAS परीक्षा में उपाध्यक्ष के संदर्भ में राजस्थान की भूमिका को समझना चाहिए। भारतीय संवैधानिक ढांचे में राजस्थान की भागीदारी महत्वपूर्ण है। राजस्थान के प्रतिनिधि संसद में उपाध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

परीक्षा पैटर्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ): RPSC RAS परीक्षा में उपाध्यक्ष से संबंधित 1-2 प्रश्न होते हैं। ये प्रश्न सामान्यतः योग्यता, चुनाव प्रक्रिया, कार्यकाल और शक्तियों पर आधारित होते हैं।

विषय आधारित प्रश्न: भारतीय संविधान के संदर्भ में उपाध्यक्ष की संवैधानिक स्थिति पर प्रश्न पूछे जाते हैं। राष्ट्रपति और उपाध्यक्ष की भूमिका में अंतर पूछा जाता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: परीक्षा में उपाध्यक्ष और अन्य संवैधानिक पदों की तुलना पूछी जाती है। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति (उपाध्यक्ष) में अंतर पूछा जा सकता है।

वर्णनात्मक प्रश्न: मुख्य परीक्षा में उपाध्यक्ष की भूमिका और महत्व पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं। उपाध्यक्ष की निष्कासन प्रक्रिया पर भी प्रश्न आते हैं।

स्मरण युक्तियां

संविधान अनुच्छेद: अनुच्छेद 63-71 को एक इकाई के रूप में याद रखें। "उपाध्यक्ष = अनुच्छेद 63 से शुरू" यह याद रखें। निष्कासन संबंधी अनुच्छेद को विशेष ध्यान दें।

योग्यता याद रखने की तकनीक: "भारतीय नागरिक, 35 वर्ष, राज्यसभा योग्य, लाभकारी पद से मुक्त" - इस क्रम में याद रखें। राष्ट्रपति की योग्यता (50 वर्ष) से इसे अलग करें।

चुनाव प्रक्रिया: "दोनों सदन + एकल संचयी मतदान" यह सूत्र याद रखें। संसद के सभी सदस्य (लोकसभा + राज्यसभा) मतदान करते हैं।

मुख्य कार्य: "राज्यसभा सभापति + अस्थायी राष्ट्रपति" - ये दो मुख्य कार्य याद रखें। अन्य राष्ट्रीय अध्यक्षों से इसे अलग करें।

इतिहास याद रखना: भारत के प्रथम उपाध्यक्ष डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। उनके नाम को उनके योगदान के साथ जोड़ें। उन्होंने बाद में राष्ट्रपति बनने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

तुलनात्मक अध्ययन: राष्ट्रपति (अनु. 52-62), उपाध्यक्ष (अनु. 63-71), प्रधानमंत्री (अनु. 74-75) को एक चार्ट में तुलना करें। इससे प्रत्येक पद की विशेषताएं स्पष्ट हो जाएंगी।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु: अनुच्छेद 65 में निर्धारित योग्यताओं को रटें। निष्कासन की प्रक्रिया (6 माह की पूर्व सूचना) को ध्यान दें। राज्यसभा का पदेन सभापति होने की भूमिका को विशेष महत्व दें।

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