कृषि (Agriculture) - RPSC RAS परीक्षा अध्ययन मार्गदर्शिका
परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
कृषि राजस्थान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और RPSC RAS परीक्षा में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। राजस्थान देश का सबसे बड़ा कृषि राज्य है, जहाँ की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियाँ कृषि को प्रभावित करती हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology) विषय के अंतर्गत रोजमर्रा के विज्ञान (Everyday Science) में कृषि एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस विषय में मिट्टी विज्ञान, फसल प्रबंधन, सिंचाई तकनीकें, कीटनाशक और उर्वरक जैसे विषय शामिल हैं जो वस्तुनिष्ठ परीक्षा में 2-3 प्रश्न निश्चित रूप से आते हैं।
मुख्य अवधारणाएं
मिट्टी की संरचना और वर्गीकरण
मिट्टी तीन मुख्य घटकों से बनी होती है - रेत (Sand), सिल्ट (Silt) और मिट्टी (Clay)। राजस्थान में मुख्य रूप से दोमट (Loam), रेतीली दोमट (Sandy Loam) और बलुई (Sandy) मिट्टी पाई जाती है। उत्तर-पूर्वी राजस्थान में काली मिट्टी, जबकि पश्चिम में बलुई मिट्टी मिलती है। मिट्टी का pH मान, जल संरक्षण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ (Organic Matter) की मौजूदगी मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है।
उर्वरक और पोषक तत्व
पौधों के लिए तीन प्रमुख पोषक तत्व आवश्यक हैं - नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटेशियम (K)। ये NPK के रूप में जाने जाते हैं। नाइट्रोजन पत्तियों की वृद्धि, फॉस्फोरस फूलों और फलों के विकास, तथा पोटेशियम पौधे की कठोरता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है। राजस्थान में यूरिया, डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) और जिंक सल्फेट जैसे उर्वरक व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। कार्बनिक खाद, वर्मीकम्पोस्ट और जैव उर्वरक (Biofertilizers) आजकल पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हैं।
सिंचाई तकनीकें और जल प्रबंधन
राजस्थान की कम वर्षा और उच्च तापमान के कारण सिंचाई कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंपरागत विधियों में कुआँ, नलकूप और तालाब हैं, जबकि आधुनिक तरीकों में बूंद-बूंद सिंचाई (Drip Irrigation) और फव्वारा सिंचाई (Sprinkler Irrigation) शामिल हैं। बूंद-बूंद सिंचाई 40-60% पानी की बचत करती है और फसल की उपज में 25-30% वृद्धि करती है। भूजल के अत्यधिक दोहन से बचने के लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) आजकल महत्वपूर्ण तकनीक बनी गई है।
कीटनाशक और रोग नियंत्रण
कृषि में कीटों (Pests) और रोगों (Diseases) से बचाव अति आवश्यक है। रासायनिक कीटनाशक (Chemical Pesticides) का अत्यधिक उपयोग मिट्टी और जल प्रदूषण का कारण बनता है। एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management - IPM) एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है जिसमें जैविक नियंत्रण, संस्कृतिगत विधियाँ और रासायनिक नियंत्रण का संयोजन होता है। जैव कीटनाशक जैसे ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास और बेसिलस थुरिनजिएनसिस (Bt) का उपयोग बढ़ रहा है।
फसल चक्र और कृषि प्रणाली
फसल चक्र (Crop Rotation) से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और बीमारियों में कमी आती है। राजस्थान में खरीफ (वर्षा ऋतु) में बाजरा, मक्का, मूँगफली तथा रबी (शीत ऋतु) में गेहूँ, सरसों, दाल प्रमुख फसलें हैं। मिश्रित कृषि (Mixed Farming) और बहुफसलीकरण (Multiple Cropping) किसानों की आय को स्थिर रखते हैं। शुष्क क्षेत्रों में बागवानी (Horticulture) और पशुपालन भी महत्वपूर्ण हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान की कृषि: राजस्थान में कृषि योग्य भूमि लगभग 65-70% है और जनसंख्या का 50% से अधिक कृषि पर निर्भर है।
- मुख्य फसलें: बाजरा (खरीफ), गेहूँ (रबी), सरसों, दाल, सूरजमुखी, कपास और तिलहन प्रमुख फसलें हैं।
- हरित क्रांति: 1960 के दशक में हरित क्रांति के कारण कृषि उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि हुई, जिससे भारत खाद्य में आत्मनिर्भर बना।
- प्रजनन: संकर बीज (Hybrid Seeds) और जलवायु प्रतिरोधी किस्मों का विकास आधुनिक कृषि का मुख्य आधार है।
- जैविक खेती: जैविक खेती (Organic Farming) से कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों से बचा जा सकता है और मिट्टी की स्वास्थ्य बनी रहती है।
- कृषि यांत्रीकरण: ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और ड्रोन का उपयोग आधुनिक कृषि में बढ़ रहा है।
- मिट्टी परीक्षण: मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) से पोषक तत्वों की कमी का पता चलता है और सटीक उर्वरक प्रयोग संभव होता है।
- जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन के कारण फसल चक्र में परिवर्तन आ रहा है और सूखा-सहनशील किस्मों की मांग बढ़ी है।
राजस्थान विशेष
भौगोलिक विशेषताएं: राजस्थान का 61% भाग मरुस्थलीय है, जहाँ वर्षा बहुत कम (25-50 सेमी) होती है। अरावली पर्वतमाला पूर्व और दक्षिण में जलवायु को प्रभावित करती है। थार मरुस्थल में पानी की कमी प्रमुख समस्या है।
राजस्थान की प्रमुख फसलें: बाजरा (ग्रीष्मकालीन), सरसों (सर्दियों में सबसे अधिक), गेहूँ, दाल, मूँगफली और तिलहन राजस्थान की मुख्य फसलें हैं। राजस्थान देश में बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक है।
सिंचाई परियोजनाएं: राजस्थान में इंदिरा गाँधी नहर (IGN) परियोजना, चंबल नदी परियोजना और भीमलत सागर परियोजना प्रमुख सिंचाई साधन हैं। IGN उत्तर-पश्चिम राजस्थान के रेतीले क्षेत्रों को सिंचित करती है।
पशुपालन: राजस्थान में पशुपालन कृषि का महत्वपूर्ण अंग है। मरु क्षेत्रों में ऊँट, भेड़ और बकरियों का पालन किया जाता है। राजस्थानी गाय (राठी, नागौरी) और ऊँट की नस्लें विश्व प्रसिद्ध हैं।
कृषि में सुधार योजनाएं: राजस्थान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मृदा स्वास्थ्य पत्र योजना कार्यान्वित की जा रही हैं।
परीक्षा पैटर्न
प्रश्न का प्रकार: RPSC RAS परीक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय के तहत कृषि से 2-3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न आते हैं। ये प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) प्रकार के होते हैं।
पूछे जाने वाले विषय: मिट्टी की किस्में, फसलें, सिंचाई विधियाँ, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्र, जैविक खेती, बीज उपचार, फसल चक्र और राजस्थान की विशेष कृषि परियोजनाएं।
कठिनाई स्तर: सामान्यतः मध्यम स्तर के प्रश्न पूछे जाते हैं, लेकिन गहन ज्ञान की आवश्यकता हो सकती है।
महत्वपूर्ण मुद्दे: हरित क्रांति, दूसरी हरित क्रांति, कृषि में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, जैविक खेती, जल संरक्षण और सतत कृषि।
स्मरण युक्तियां
NPK याद रखें: नाइट्रोजन = Leaves (पत्तियाँ), फॉस्फोरस = Flowers & Fruits (फूल और फल), पोटेशियम = Kernel & Strength (बीज और कठोरता)। इस तरीके से तीनों पोषक तत्वों के कार्य आसानी से याद रहते हैं।
सिंचाई विधियाँ: "D-S-F" याद रखें - Drip (बूंद-बूंद), Sprinkler (फव्वारा), Flood (बाढ़)। ये तीनों सिंचाई की मुख्य आधुनिक विधियाँ हैं।
राजस्थान की फसलें: खरीफ = "BMM" (बाजरा, मक्का, मूँगफली), रबी = "GSD" (गेहूँ, सरसों, दाल)।
मिट्टी के प्रकार: "Black-Brown-Red-Yellow-Alluvial" - ये भारत की पाँच मुख्य मिट्टियाँ हैं। राजस्थान में मुख्यतः लाल, भूरी और बलुई मिट्टी पाई जाती है।
हरित क्रांति से संबंधित: M.S. स्वामीनाथन को भारतीय हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है। इंदिरा गाँधी नहर को "जीवन रेखा" कहा जाता है।
परीक्षा की तैयारी के सुझाव: NCERT की किताबें, राजस्थान की कृषि विभाग की वेबसाइट और पिछली परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का अध्ययन आवश्यक है। कृषि विज्ञान केंद्रों की जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
वर्तमान घटनाक्रम: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि विधेयक, जलवायु परिवर्तन और मिट्टी स्वास्थ्य से संबंधित समाचार नियमित रूप से पढ़ते रहें।