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RPSC RAS परीक्षा - ऊर्जा तकनीक अध्ययन पुस्तिका

Energy Tech - RPSC RAS Exam Study Guide

12 मिनटintermediate· Science and Technology
ऊर्जा तकनीक - RPSC RAS अध्ययन पुस्तिका

ऊर्जा तकनीक

विषय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी | अध्याय: दैनंदिन विज्ञान | विषयवस्तु: ऊर्जा तकनीक

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

ऊर्जा तकनीक आधुनिक समय की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है। RPSC RAS परीक्षा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी खंड में ऊर्जा तकनीक का विशेष महत्व है। आज की विश्व अर्थव्यवस्था में ऊर्जा के स्रोत, उत्पादन, वितरण और संरक्षण की समझ राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए अपरिहार्य है। राजस्थान, जो सौर ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र है, के प्रशासन के लिए इस विषय की गहन समझ आवश्यक है।

परीक्षा में इस विषय से आने वाले प्रश्न साधारणतः ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस), पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा स्रोतों (सौर, वायु, जल विद्युत), ऊर्जा संरक्षण तकनीकों और भारत की ऊर्जा नीति पर केंद्रित होते हैं। राजस्थान की ऊर्जा नीति और यहां की विशेष परियोजनाओं का ज्ञान भी परीक्षार्थी के लिए लाभकारी है।

मुख्य अवधारणाएं

१. पारंपरिक ऊर्जा स्रोत (जीवाश्म ईंधन)

पारंपरिक ऊर्जा स्रोत मुख्यतः जीवाश्म ईंधन हैं जिनमें कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस शामिल हैं। कोयला भारत की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन है और भारत के विद्युत उत्पादन का लगभग ७०% कोयले से होता है। पेट्रोलियम मुख्यतः परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग होता है। इन स्रोतों के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण होता है और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है। भारत अपनी ऊर्जा की मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा व्यय बढ़ता है।

२. पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत

पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत वह ऊर्जा स्रोत हैं जो प्रकृति में अनंत काल तक उपलब्ध रहते हैं। सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा, जल विद्युत, भूतापीय ऊर्जा और बायोमास ऊर्जा प्रमुख पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत हैं। भारत सरकार ने २०३० तक ५०० गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। सौर ऊर्जा विशेषकर राजस्थान में बहुत संभावनाशील है क्योंकि यह क्षेत्र साल में ३००+ दिन धूप प्राप्त करता है। पवन ऊर्जा गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में विकसित हो रही है।

३. सौर ऊर्जा तकनीकें

सौर ऊर्जा तकनीकें दो प्रकार की होती हैं - फोटोवोल्टिक (PV) और सोलर थर्मल। फोटोवोल्टिक तकनीक में सिलिकॉन सेल सीधे सूर्य के प्रकाश को विद्युत में परिवर्तित करते हैं। सोलर थर्मल तकनीक में सूर्य की ऊष्मा को पानी गर्म करने या ताप विद्युत संयंत्रों में भाप उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है। राजस्थान में खिमसर-मोहनगढ़ में सोलर थर्मल पार्क और जैसलमेर में सौर ऊर्जा संयंत्र महत्वपूर्ण हैं। सौर पैनलों की दक्षता में क्रमिक सुधार हो रहा है और लागत में भी कमी आ रही है।

४. ऊर्जा संरक्षण और दक्षता

ऊर्जा संरक्षण का अर्थ है ऊर्जा का बुद्धिमानी से उपयोग करना और अनावश्यक व्यय को कम करना। भारत सरकार ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम २००१ में पारित किया है। औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। भवन क्षेत्र में LED लैंप, ऊर्जा-कुशल उपकरण और बेहतर इंसुलेशन का उपयोग ऊर्जा बचाने में मदद करता है। स्मार्ट मीटर और स्मार्ट ग्रिड तकनीकें ऊर्जा वितरण और खपत को अनुकूलित करती हैं। परिवहन क्षेत्र में विद्युत वाहनों का प्रचार ऊर्जा संरक्षण का एक महत्वपूर्ण कदम है।

५. परमाणु और जल विद्युत ऊर्जा

भारत में वर्तमान में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता लगभग ६,७०० मेगावाट है। परमाणु ऊर्जा कार्बन-मुक्त और उच्च दक्षता वाली ऊर्जा है किंतु परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन एक चुनौती है। भारत में जल विद्युत ऊर्जा का विशाल संभावनाशील संसाधन है। राजस्थान में चंबल, माही, लूनी और इंदिरा गांधी नहर परियोजनाओं से जल विद्युत उत्पादन होता है। पंपिंग स्टेशनों के माध्यम से जल विद्युत को संचित किया जा सकता है जो अतिरिक्त लचीलापन प्रदान करता है। जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन आवश्यक है।

महत्वपूर्ण तथ्य

• भारत की ऊर्जा स्थिति: भारत विश्व में विद्युत उत्पादन के मामले में चौथे स्थान पर है।

• अक्षय ऊर्जा: भारत ने २०२२ तक १७५ गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पार कर दी है।

• कोयला भंडार: भारत के पास विश्व के कुल कोयला भंडार का लगभग १०% है।

• सौर विकिरण: भारत सालाना औसतन ५-७ kWh/m² सौर विकिरण प्राप्त करता है।

• हरित ऊर्जा: 'प्रत्येक घर जनरेटर' योजना छत्तीस अरब रुपये की निवेश योजना है।

• बायोमास: भारत में कृषि अपशिष्ट से ४,००० MW विद्युत उत्पादन संभव है।

• ऊर्जा घनत्व: विभिन्न ईंधनों की ऊर्जा सामग्री अलग-अलग होती है - कोयला ~२५ MJ/kg, पेट्रोल ~४६ MJ/kg।

राजस्थान विशेष

राजस्थान भारत की ऊर्जा नीति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्य में ऊर्जा उत्पादन के लिए कोयला आधारित तापीय संयंत्रों का विशाल नेटवर्क है। राजस्थान में छह परमाणु ऊर्जा संयंत्र (राणा प्रताप सागर और राजस्थान आणविक विद्युत संयंत्र) स्थित हैं। राज्य में सौर ऊर्जा का विकास अत्यंत प्रभावशाली रहा है।

जैसलमेर जिले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सौर ऊर्जा परियोजनाएं हैं। खिमसर और मोहनगढ़ में केंद्रीकृत सौर तापीय संयंत्र हैं। राजस्थान सौर ऊर्जा में भारत के शीर्ष राज्यों में से एक है। पवन ऊर्जा के लिए जैसलमेर, बाड़मेर और जालोर जिले अनुकूल हैं। राजस्थान पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा निगम सीमित (SECI) द्वारा संचालित परियोजनाएं यहां कार्यरत हैं। चंबल नदी पर बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से जल विद्युत उत्पादन होता है।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में ऊर्जा तकनीक से आने वाले प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) और लघुत्तरीय दोनों प्रकार के हो सकते हैं। सामान्यतः निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं:

• ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण और उनकी विशेषताएं

• भारत की ऊर्जा नीति और लक्ष्य

• नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा में अंतर

• सौर, वायु और जल विद्युत की प्रौद्योगिकियां

• राजस्थान में ऊर्जा परियोजनाएं और उनकी क्षमता

• ऊर्जा संरक्षण के उपाय और कानूनी ढांचा

• जलवायु परिवर्तन से संबंध और कार्बन तटस्थता

स्मरण युक्तियां

१. RENEWABLE को याद रखें: सौर (Solar), पवन (Wind), जल (Hydro), भूतापीय (Geothermal), बायोमास (Biomass)।

२. भारत के शीर्ष ऊर्जा उत्पादक राज्य: कोयला - ओडिशा, छत्तीसगढ़; सौर - राजस्थान, गुजरात; पवन - तमिलनाडु, गुजरात।

३. संख्यात्मक लक्ष्य: २०३० - ५०० GW; २०४२ - कार्बन तटस्थता।

४. राजस्थान स्मरणीय तथ्य: जैसलमेर (सौर), बाड़मेर (पवन), चंबल (जल विद्युत)।

५. ऊर्जा संरक्षण का 4P नियम: Plan (योजना), Process (प्रक्रिया), Product (उत्पाद), People (लोग)।

६. तुलनात्मक तालिका बनाएं: पारंपरिक vs पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा के अंतर को स्पष्ट करने के लिए।

७. समसामयिक विकास को नोट करें: हाल की परियोजनाओं, नीति परिवर्तन और नई तकनीकों के बारे में अपडेट रहें।

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