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RPSC RAS परीक्षा - पर्यावरण (पर्यावरणीय विज्ञान) अध्ययन मार्गदर्शिका

Environment - Everyday Science Study Guide for RPSC RAS

12 मिनटadvanced· Science and Technology

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

पर्यावरण राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की RAS परीक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। दैनिक विज्ञान के इस विभाग में पर्यावरण से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान और राजस्थान विशेष दोनों पहलुओं से पूछे जाते हैं। RPSC RAS परीक्षा में प्रायः 5-8 प्रश्न पर्यावरण विषय से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पूछे जाते हैं।

पर्यावरण शिक्षा का महत्व आजकल के समय में अत्यंत बढ़ गया है क्योंकि भारत की प्रशासनिक परीक्षाओं में पर्यावरणीय जागरूकता और संरक्षण से संबंधित नीतियों का विस्तृत आकलन किया जाता है। राजस्थान राज्य की विशेष भौगोलिक स्थिति, जलवायु परिस्थितियां और पर्यावरणीय चुनौतियां इस विषय को और भी प्रासंगिक बनाती हैं।

मुख्य अवधारणाएं

1. पर्यावरण की परिभाषा और घटक

पर्यावरण शब्द का अर्थ हमारे चारों ओर की सभी जीवित और निर्जीव वस्तुओं के संपूर्ण समुच्चय से है। पर्यावरण के मुख्य घटक हैं - जैविक घटक (पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव) और अजैविक घटक (वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश, तापमान)। भारतीय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अनुसार, पर्यावरण में जल, वायु, मिट्टी और इनमें निहित सभी जीव-जंतु शामिल हैं।

2. पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem)

पारिस्थितिकी तंत्र जीवों और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच एक जटिल संबंध है। इसमें उत्पादक (पौधे), उपभोक्ता (जानवर) और अपघटनकर्ता (बैक्टीरिया, कवक) शामिल होते हैं। राजस्थान में मुख्य पारिस्थितिकी तंत्र हैं - थार मरुस्थल, घास के मैदान और वन क्षेत्र। ऊर्जा का प्रवाह सूर्य से आता है और भोजन श्रृंखला के माध्यम से विभिन्न जीवों तक पहुंचता है।

3. जलचक्र, कार्बन चक्र और नाइट्रोजन चक्र

जलचक्र पृथ्वी पर जल के परिसंचरण की प्रक्रिया है जिसमें वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा शामिल है। कार्बन चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल से पौधों द्वारा ग्रहण की जाती है और भोजन श्रृंखला के माध्यम से आगे बढ़ती है। नाइट्रोजन चक्र में नाइट्रोजन वायुमंडल से जीवों तक पहुंचती है। ये सभी चक्र प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

4. जैव विविधता और संरक्षण

जैव विविधता से तात्पर्य पृथ्वी पर पाई जाने वाली सभी जीवों की विविधता से है। भारत विश्व के सबसे जैव विविध देशों में से एक है। राजस्थान में वनस्पतियों और जीवों की विविध प्रजातियां पाई जाती हैं। राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जैव विविधता क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत का जैव विविधता संरक्षण नीति 2014 जैव विविधता के रक्षण पर जोर देती है।

5. प्रदूषण के प्रकार और नियंत्रण

प्रदूषण मुख्यतः चार प्रकार का होता है - वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। वायु प्रदूषण में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कण पदार्थ शामिल हैं। जल प्रदूषण रासायनिक और जैविक अपशिष्टों से होता है। ओजोन परत का क्षरण पराबैंगनी विकिरण से हानिकारक है। ग्रीनहाउस गैसें जलवायु परिवर्तन का कारण बनती हैं। राजस्थान में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

वायुमंडल की संरचना: नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21% और अन्य गैसें 1% हैं। ओजोन परत 15-35 किमी की ऊंचाई पर स्थित है।

जल संसाधन: पृथ्वी पर 97% खारा जल और 3% मीठा जल है। मीठे पानी का 70% हिमनद और ध्रुवीय क्षेत्रों में है।

जलवायु परिवर्तन: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का स्तर 1950 में 310 ppm था, अब 420 ppm से अधिक है।

वन संरक्षण: भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24% वन से ढका हुआ है। राजस्थान में वन क्षेत्र राज्य के कुल क्षेत्र का लगभग 9.6% है।

जन्तु संरक्षण: बाघ परियोजना 1973 में शुरू की गई। भारत में 51 बाघ अभयारण्य हैं। राजस्थान में रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान विश्व प्रसिद्ध है।

मरुस्थलीकरण: राजस्थान का लगभग 61% भाग मरुस्थलीकरण से प्रभावित है। इंदिरा गांधी नहर इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण है।

पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा: सूर्य, वायु और जल से प्राप्त ऊर्जा पुनर्नवीकरणीय है। राजस्थान सौर ऊर्जा में भारत में अग्रणी है।

राजस्थान विशेष

थार मरुस्थल: राजस्थान का लगभग 60% भाग थार मरुस्थल से ढका है। यह विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल है। यहां कम वर्षा (25-50 सेमी प्रति वर्ष) होती है और तापमान 50°C तक पहुंच जाता है।

जल संसाधन: राजस्थान में पानी की कमी एक गंभीर समस्या है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना राज्य की जीवन रेखा है। चंबल, बनास और सरस्वती नदियां प्रमुख जल स्रोत हैं।

वन और वन्यजीव: राजस्थान में 33 वन्यजीव अभयारण्य हैं। रणथम्भोर और सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख हैं। खजूरी घास (धमन) और बबूल यहां की प्रमुख वनस्पति है।

पर्यावरणीय चुनौतियां: वायु प्रदूषण, जल की कमी, मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और खनन गतिविधियां राजस्थान की मुख्य पर्यावरणीय समस्याएं हैं।

संरक्षण नीतियां: राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019, राजस्थान वन नीति 2010 और आरएमएसए कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण हैं।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में पर्यावरण विषय से सवाल निम्नलिखित तरीकों से पूछे जाते हैं:

बहु-विकल्पीय प्रश्न (MCQ): परीक्षा का मुख्य भाग। पर्यावरण से 5-8 प्रश्न दिए जाते हैं। प्रश्नों में पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, संरक्षण नीतियां और राजस्थान विशेष विषय शामिल होते हैं।

गलत तथ्य पहचान: दिए गए विकल्पों में से गलत बयान को चुनना पड़ता है। पर्यावरणीय आंकड़ों और नीतियों से संबंधित ऐसे प्रश्न आम हैं।

तुलना आधारित: दो अवधारणाओं या क्षेत्रों के बीच अंतर पूछना। उदाहरण - प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाम कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र।

राजस्थान केंद्रित: राज्य की विशेष पर्यावरणीय परिस्थितियों, राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षण प्रयासों से संबंधित प्रश्न।

स्मरण युक्तियां

संक्षिप्त नाम याद रखें: IUCN, WWF, UNEP, CBD, EPA जैसे संगठनों के पूरे नाम याद करें।

सूचकांक और आंकड़े: वनों का प्रतिशत (24%), ओजोन परत की ऊंचाई (15-35 किमी), कार्बन डाइऑक्साइड का वर्तमान स्तर (420 ppm) को दोहराएं।

राजस्थान की तुलनात्मक जानकारी: भारतीय औसत के साथ राजस्थान की स्थिति को तुलना करें। उदाहरण - राष्ट्रीय वन क्षेत्र 24% है, जबकि राजस्थान में यह 9.6% है।

समय-क्रम विधि: महत्वपूर्ण नीतियों और परियोजनाओं का समय-क्रम याद करें - बाघ परियोजना 1973, जैव विविधता नीति 2014, आदि।

चित्रात्मक स्मरण: भोजन श्रृंखला, जलचक्र, कार्बन चक्र को चित्रों के माध्यम से याद करें।

विपरीत जोड़ी बनाएं: पुनर्नवीकरणीय × गैर-नवीकरणीय, प्राकृतिक × कृत्रिम, जैविक × अजैविक जैसे विपरीत शब्दों के जोड़े बनाएं।

वास्तविक उदाहरण सीखें: केस स्टडी के रूप में वास्तविक परियोजनाएं पढ़ें - रणथम्भोर में बाघ संरक्षण, इंदिरा गांधी नहर परियोजना आदि।

समाचार पत्र पढ़ें: पर्यावरण से संबंधित समाचारों को नियमित रूप से पढ़ें और वर्तमान मुद्दों से अवगत रहें।

इस अध्ययन मार्गदर्शिका को नियमित रूप से दोहराएं और पिछले वर्षों के प्रश्नों का समाधान करें। पर्यावरण विषय को गहन ज्ञान के साथ पढ़ने से RPSC RAS परीक्षा में सफलता सुनिश्चित हो सकती है।

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