परिचय
कच्छवाहा वंश राजस्थान के सबसे प्रभावशाली राजपूत वंशों में से एक है। उत्पत्ति सूर्यवंश से। इस वंश ने आमेर को राजधानी बनाया और बाद में जयपुर नगर की स्थापना की।
वंश की स्थापना
कच्छवाहा वंश की स्थापना 967 ई. में दुल्हेराय (धोला राय) ने की। बड़गूजरों को पराजित कर दौसा और रामगढ़ पर अधिकार। परंपरागत मान्यता — अयोध्या के राजा रामचंद्र के पुत्र कुश के वंशज।
प्रमुख शासक
भारमल (1547–1574): अकबर के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने वाले प्रथम राजपूत। इनकी पुत्री जोधाबाई का विवाह अकबर से 1562 ई. में।
मानसिंह प्रथम (1589–1614): अकबर के प्रमुख सेनापति। अकबर के नवरत्नों में। आमेर का भव्य किला।
सवाई जयसिंह द्वितीय (1699–1743): 1727 ई. में जयपुर नगर की स्थापना। जंतर-मंतर वेधशालाएं।
जयपुर नगर की स्थापना
18 नवंबर 1727 ई. वास्तुकार: बंगाल के विद्याधर भट्टाचार्य। भारत का पहला नियोजित नगर। 9 खंडों में विभाजित। "गुलाबी नगर" (Pink City)।
जंतर-मंतर
जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन और वाराणसी में निर्माण। जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा — यूनेस्को विश्व धरोहर। "जिज-मुहम्मद शाही" खगोलीय तालिकाएं।
RAS Prelims में महत्व
सवाई जयसिंह द्वितीय और जयपुर की स्थापना — सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न। जंतर-मंतर वर्ष और स्थान। भारमल-अकबर संधि 1562। विद्याधर भट्टाचार्य बंगाल के थे।