बैंकिंग प्रणाली एवं भारतीय अर्थव्यवस्था
परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
बैंकिंग प्रणाली किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है। RPSC RAS परीक्षा में 'आर्थिक अवधारणा एवं भारतीय अर्थव्यवस्था' विषय के अंतर्गत बैंकिंग से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। यह विषय मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 में आता है। बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से हम भारतीय अर्थव्यवस्था की मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास को समझ सकते हैं। राजस्थान की आर्थिक प्रगति में भी बैंकिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए इस विषय का विस्तृत ज्ञान RPSC परीक्षा में सफलता के लिए अत्यावश्यक है।
मुख्य अवधारणाएं
१. बैंकिंग की परिभाषा एवं कार्य
बैंकिंग शब्द 'बैंको' (Banco) से निकला है जिसका अर्थ है एक लकड़ी की बेंच या मेज जहाँ धन का लेनदेन होता था। आधुनिक संदर्भ में, बैंकिंग जमा को स्वीकार करने, ऋण प्रदान करने और धन हस्तांतरण की सेवा प्रदान करने का कार्य है। भारतीय बैंकिंग नियम अधिनियम, 1949 के अनुसार बैंकिंग का अर्थ जमाकर्ताओं से जनता के लिए जमा रकम स्वीकार करना है और उन जमा राशियों को विनिमय, ऋण या निवेश के माध्यम से उधार देना है। बैंकों के प्रमुख कार्यों में जमा स्वीकृति, ऋण वितरण, विदेशी मुद्रा विनिमय, सुरक्षा प्रबंधन और सलाहकारी सेवाएं शामिल हैं।
२. बैंकिंग प्रणाली के प्रकार
भारतीय बैंकिंग प्रणाली एक बहु-स्तरीय संरचना है जिसे निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: (अ) केंद्रीय बैंक - भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जो सर्वोच्च मौद्रिक प्राधिकार है; (ब) व्यावसायिक बैंक - जो जनता को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं; (स) सहकारी बैंक - जो स्थानीय स्तर पर सहकारी समिति के आधार पर कार्य करते हैं; (द) विशेषीकृत बैंक - जैसे कृषि विकास बैंक, औद्योगिक विकास बैंक आदि। भारतीय अर्थव्यवस्था में ये सभी प्रकार की बैंकें आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
३. भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका एवं कार्य
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना वर्ष 1935 में हिलटन यंग कमीशन की सिफारिश पर की गई थी। RBI भारत का केंद्रीय बैंक है और यह मौद्रिक नीति का निर्माता है। इसके प्रमुख कार्यों में मुद्रा आपूर्ति का नियंत्रण, ब्याज दरों में परिवर्तन, बैंकों के लिए वैधानिक आवश्यकताओं का निर्धारण, विदेशी मुद्रा के भंडार का प्रबंधन, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना और अन्य व्यावसायिक बैंकों की देखरेख करना शामिल है। RBI की नीतिगत दरों (रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट) में परिवर्तन पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
४. ऋण वितरण एवं साख संरचना
बैंकों का प्राथमिक कार्य जमाकर्ताओं की पूंजी को उधारकर्ताओं को ऋण प्रदान करना है। इस प्रक्रिया को साख सृजन (Credit Creation) कहा जाता है। भारतीय बैंकें कृषि, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), बड़े उद्योग, व्यक्तिगत ऋण और आवास ऋण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वित्तपोषण प्रदान करती हैं। प्रत्येक बैंक को अपनी कुल ऋण राशि का न्यूनतम 40% कृषि और संबंधित गतिविधियों में निवेश करना आवश्यक है। यह नीति ग्रामीण विकास और कृषक कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
५. डिजिटल बैंकिंग एवं आर्थिक समावेशन
वर्तमान में भारत में डिजिटल बैंकिंग में तेजी से विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। मोबाइल बैंकिंग, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), डिजिटल वॉलेट और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बैंकिंग को सभी के लिए सुलभ बनाया है। आर्थिक समावेशन भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है और डिजिटल बैंकिंग इसे प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय बैंकिंग अधिनियम 1949: यह अधिनियम बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करता है और RBI को नियामक शक्तियां प्रदान करता है।
- बैंक राष्ट्रीयकरण: पहला राष्ट्रीयकरण 1969 में 14 बैंकों के साथ हुआ था। दूसरा राष्ट्रीयकरण 1980 में 6 बैंकों के साथ किया गया।
- CRR और SLR: नकद आरक्षण अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) मौद्रिक नीति के महत्वपूर्ण उपकरण हैं।
- BASEL मानदंड: भारतीय बैंकें BASEL III मानदंडों का पालन करती हैं, जो पूंजी पर्याप्तता को सुनिश्चित करता है।
- डिपोजिट इंश्योरेंस: DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) जमाकर्ताओं की राशि को 5 लाख रुपये तक सुरक्षित रखता है।
- प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग: बैंकों को कुल ऋण राशि का 40% प्राथमिकता क्षेत्र को देना अनिवार्य है।
राजस्थान विशेष
राजस्थान भारत की एक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था वाला राज्य है और यहाँ बैंकिंग का विशेष महत्व है। राजस्थान में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से लाखों किसानों को सस्ते दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। राजस्थान सहकारी बैंक नेटवर्क शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विकसित है। जयपुर, अजमेर और उदयपुर जैसे प्रमुख शहरों में बैंकिंग क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। पर्यटन उद्योग के विकास में भी बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राजस्थान में कृषि ऋण वितरण और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से बैंकिंग ग्रामीण विकास में सहायक भूमिका निभा रही है।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में बैंकिंग से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित रूपों में पूछे जाते हैं:
- वस्तुनिष्ठ प्रश्न: RBI के कार्य, बैंकिंग प्रणाली के प्रकार, मौद्रिक नीति के उपकरण आदि पर बहुविकल्पीय प्रश्न।
- आवश्यक तारीखें: बैंक राष्ट्रीयकरण की तारीखें, RBI की स्थापना, महत्वपूर्ण नीतियों की घोषणा आदि।
- तुलनात्मक प्रश्न: विभिन्न प्रकार की बैंकों के बीच अंतर, पुरानी और नई बैंकिंग व्यवस्था में अंतर।
- मामला अध्ययन: भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित बैंकिंग नीतियों के प्रभाव पर प्रश्न।
- आंकड़े और सांख्यिकी: ऋण वितरण, बैंकिंग विकास सूचकांक, जमा और ऋण अनुपात आदि।
स्मरण युक्तियां
- 'RBI' याद रखें: Reserve = आरक्षित, Bank = बैंक, India = भारत - यह भारत का केंद्रीय बैंक है।
- '40-40 नियम': 40% कृषि को और 40% प्राथमिकता क्षेत्र को कुल ऋण देना अनिवार्य है।
- '3 काली': CRR, SLR और रेपो रेट - ये तीनों मौद्रिक नीति के मुख्य उपकरण हैं।
- 'PMJDY': प्रधानमंत्री जन धन योजना - आर्थिक समावेशन के लिए महत्वपूर्ण योजना।
- '1969 + 1980': दो बार बैंक राष्ट्रीयकरण हुआ - 1969 में और 1980 में।
- 'DICGC की सुरक्षा': 5 लाख रुपये तक की जमा राशि सुरक्षित रहती है।
- 'UPI क्रांति': डिजिटल बैंकिंग में भारत ने तेजी से प्रगति की है।
- राजस्थान की विशेषता: कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड योजना पर विशेष ध्यान दें।
अंतिम नोट: बैंकिंग एक गतिशील विषय है जो लगातार विकसित हो रहा है। समाचार पत्रों और RBI की आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम नीतियों और निर्णयों से अवगत रहें। RPSC परीक्षा में सफलता के लिए इस विषय को मुख्य अर्थशास्त्र से जोड़कर समझना महत्वपूर्ण है।