मुख्य सामग्री पर जाएं
RAS Prelims 2026 — तैयारी जारी रखें
📚 आर्थिक अवधारणाएं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था

राजकोषीय नीति - RPSC RAS परीक्षा के लिए अध्ययन गाइड

Fiscal Policy - RPSC RAS Exam Study Guide

12 मिनटintermediate· Economic Concepts and Indian Economy
राजकोषीय नीति - RPSC RAS अध्ययन गाइड

राजकोषीय नीति

विषय: आर्थिक अवधारणाएं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था | RPSC RAS परीक्षा गाइड

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

राजकोषीय नीति भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है और RPSC RAS परीक्षा में इसका बहुत महत्व है। राजकोषीय नीति सरकार द्वारा आय और व्यय संबंधी निर्णयों का समूह है जो आर्थिक विकास, मुद्रास्फीति नियंत्रण और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह नीति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 265 के तहत अनुमोदित है।

RPSC RAS परीक्षा में राजकोषीय नीति से संबंधित प्रश्न सामान्य अध्ययन के आर्थिक अवधारणा भाग में पूछे जाते हैं। इसमें बजट प्रक्रिया, कर व्यवस्था, सार्वजनिक ऋण, राजस्थान की राजकोषीय स्थिति और भारत की राजकोषीय नीति के उद्देश्य जैसे विषय शामिल होते हैं। इन सभी विषयों को गहराई से समझना आवश्यक है।

मुख्य अवधारणाएं

1. राजकोषीय नीति की परिभाषा एवं उद्देश्य

राजकोषीय नीति सरकार की कुल आय और व्यय से संबंधित नीति है। यह सरकार के कर राजस्व, ऋण और व्यय पर नियंत्रण रखती है। इसके मुख्य उद्देश्य हैं: आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, रोजगार सृजन करना, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना, सामाजिक कल्याण को बढ़ाना और राजस्व संग्रह करना। भारत में राजकोषीय नीति का निर्माण वित्त मंत्रालय द्वारा किया जाता है और संसद द्वारा अनुमोदित किया जाता है।

2. कर व्यवस्था और राजस्व संग्रह

भारतीय कर व्यवस्था को दो भागों में विभाजित किया जाता है: प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर। प्रत्यक्ष कर में आयकर, कॉर्पोरेट कर और संपत्ति कर शामिल हैं। अप्रत्यक्ष कर में वस्तु एवं सेवा कर (GST), उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क शामिल हैं। वर्ष 2017 में भारत में GST लागू किया गया जो एक अप्रत्यक्ष कर है। राजस्थान में कई स्थानीय कर भी लागू हैं जैसे संपत्ति कर, मनोरंजन कर और होटल कर।

3. सार्वजनिक व्यय और बजट प्रक्रिया

सार्वजनिक व्यय सरकार की विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं के लिए किया जाता है। बजट एक वित्तीय दस्तावेज है जिसमें आय और व्यय का अनुमान लगाया जाता है। भारत में बजट प्रक्रिया अत्यंत जटिल है और इसमें कई चरण होते हैं। वित्त मंत्री द्वारा प्रत्येक वर्ष सामान्य बजट प्रस्तुत किया जाता है। भारत का बजट वर्ष फरवरी से शुरू होकर अगले वर्ष के जनवरी तक चलता है।

4. राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण

राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का व्यय उसकी आय से अधिक होता है। यह आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति दोनों को प्रभावित करता है। सार्वजनिक ऋण वह ऋण है जो सरकार आंतरिक और बाहरी स्रोतों से लेती है। भारत के राजकोषीय नीति फ्रेमवर्क के अनुसार, राजकोषीय घाटा GDP का 3.5% रहना चाहिए।

5. मौद्रिक और राजकोषीय नीति का समन्वय

मौद्रिक नीति रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित की जाती है जबकि राजकोषीय नीति सरकार द्वारा। इन दोनों नीतियों का समन्वय आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सरकार अधिक व्यय करती है तो रिज़र्व बैंक को ब्याज दरों को बढ़ाना पड़ सकता है। इसे क्राउडिंग आउट प्रभाव कहा जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

• भारतीय बजट: भारत का वार्षिक बजट फरवरी में प्रस्तुत किया जाता है। केंद्रीय बजट, राज्य बजट और संघन तीन प्रकार के बजट होते हैं।

• राजस्व और पूंजीगत व्यय: राजस्व व्यय चालू गतिविधियों के लिए होता है जबकि पूंजीगत व्यय दीर्घकालीन संपत्ति सृजन के लिए होता है।

• GST संग्रह: राजस्थान GST के तहत 5%, 12%, 18% और 28% की दरों पर कर संग्रह करता है।

• ऋण सीमा: FRBM अधिनियम के अनुसार, भारत का सार्वजनिक ऋण GDP का 60% से अधिक नहीं होना चाहिए।

• अप्रत्यक्ष कर: भारत में GST के कार्यान्वयन के बाद अप्रत्यक्ष कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

राजस्थान विशेष

राजस्थान का राजकोषीय स्थिति भारत की तुलना में अलग है। राजस्थान की कुल आय में कृषि, पर्यटन, खनन और औद्योगिक विकास से राजस्व शामिल होता है। पर्यटन राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है, जिसमें जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहर प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

राजस्थान सरकार विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करती है जैसे कृषि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और सड़क निर्माण। राजस्थान की राजकोषीय नीति भी कई बार घाटे का सामना करती है, जिसके लिए सरकार केंद्र से अनुदान और ऋण लेती है। राजस्थान में RTI के तहत सूचना पाई जा सकती है जो स्थानीय स्तर पर बजट से संबंधित जानकारी प्रदान करती है।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में राजकोषीय नीति से संबंधित प्रश्नों के प्रकार:

1. सामान्य ज्ञान प्रश्न: "भारत में GST कब लागू किया गया?" या "भारत का राजकोषीय वर्ष कब शुरू होता है?"

2. अवधारणात्मक प्रश्न: "राजकोषीय घाटा को परिभाषित करें" या "प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में अंतर बताएं"

3. नीति विश्लेषण प्रश्न: "भारत की वर्तमान राजकोषीय नीति के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?"

4. राजस्थान केंद्रित प्रश्न: "राजस्थान में प्रमुख राजस्व स्रोत कौन से हैं?"

RPSC RAS परीक्षा में 150 प्रश्न पूछे जाते हैं और प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक दिए जाते हैं। सामान्य अध्ययन के आर्थिक भाग में 15-20 प्रश्न राजकोषीय नीति से संबंधित हो सकते हैं।

स्मरण युक्तियां

1. FRBM याद रखें: Fiscal Responsibility and Budget Management Act - यह अधिनियम राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करता है। इसे 2003 में लागू किया गया था।

2. बजट के स्तर: Central → State → Local - यह त्रिस्तरीय संरचना है।

3. कर सूत्र: प्रत्यक्ष कर (सीधे व्यक्ति से) + अप्रत्यक्ष कर (वस्तुओं पर) = कुल कर राजस्व

4. राजस्थान विशेष: पर्यटन + कृषि + खनन = प्रमुख राजस्व स्रोत

5. महत्वपूर्ण तारीखें: बजट फरवरी में, GST जुलाई 2017 में, FRBM 2003 में - इन तारीखों को याद रखें।

6. अंग्रेजी शब्दों को समझें: Fiscal = राजकोषीय, Deficit = घाटा, Debt = ऋण, Revenue = राजस्व - ये शब्द परीक्षा में आते हैं।

7. तुलनात्मक चार्ट बनाएं: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, राजस्व और पूंजीगत व्यय, आदि की तुलना के लिए चार्ट बनाएं।

8. मामले का अध्ययन: GST कार्यान्वयन, दिमित करण, आर्थिक सुधार आदि की वास्तविक घटनाओं का अध्ययन करें।

सफलता के लिए नियमित अभ्यास, पिछली परीक्षाओं का विश्लेषण और करेंट अफेयर्स का अनुसरण आवश्यक है।

इसी विषय के अन्य गाइड