परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
गरीबी आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण की चुनौतियों का एक मुख्य विषय है। RPSC RAS परीक्षा में भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में गरीबी का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विषय मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-२ में भारतीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और सार्वजनिक नीति के अंतर्गत आता है। गरीबी की परिभाषा, मापन, कारण, प्रभाव और इसे कम करने के उपाय परीक्षा के प्रमुख प्रश्न बिंदु हैं।
मुख्य अवधारणाएं
१. गरीबी की परिभाषा और अवधारणा
गरीबी एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति या परिवार की आय या संसाधन न्यूनतम जीवन स्तर के लिए आवश्यक माना जाने वाली राशि से कम होते हैं। विश्व बैंक के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन १.९० अमेरिकी डॉलर से कम पर जीवन यापन करते हैं, वे चरम गरीबी में माने जाते हैं। भारत में गरीबी का अर्थ आवश्यक खाद्य और गैर-खाद्य आवश्यकताओं को पूरा न कर पाने की क्षमता से है। गरीबी केवल आर्थिक अभाव नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी है।
२. गरीबी रेखा और मापन विधियां
भारत में गरीबी को मापने के लिए "गरीबी रेखा" (Poverty Line) का प्रयोग किया जाता है। यह एक निर्धारित आय स्तर है जिसके नीचे लोगों को गरीब माना जाता है। टेंडुलकर समिति (२००९) ने शहरी क्षेत्रों में मासिक प्रति व्यक्ति आय रुपये ८४७ और ग्रामीण क्षेत्रों में रुपये ५६५ निर्धारित की थी। रंगराजन समिति (२०१४) ने यह आंकड़े बढ़ाकर शहरी क्षेत्र में रुपये १००० और ग्रामीण क्षेत्र में रुपये ७१० कर दिए। हाल में, नीति आयोग बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) का प्रयोग कर रहा है जो शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के तीन आयामों को ध्यान में रखता है।
३. गरीबी के कारण और निर्धारक
भारत में गरीबी के मुख्य कारण हैं: (१) बेरोजगारी और अल्प रोजगार - कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, (२) शिक्षा का अभाव - कौशल विकास की कमी, (३) भूमि और संसाधनों का असमान वितरण, (४) जातिगत और लैंगिक भेदभाव, (५) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमजोरी, (६) औद्योगीकरण की सीमित गति, (७) बीमारी और आपातकालीन खर्च, (८) राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार। आयोग के अनुसार भारत में वर्ष २०११-१२ में गरीबी की दर लगभग २१.९% थी जो २०१९-२० में घटकर १६.४% रह गई है।
४. गरीबी का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
गरीबी मानव विकास में बाधा डालती है। इसके कारण बाल श्रम, महिला शोषण, कुपोषण और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि होती है। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं होने से संक्रामक रोगों का प्रसार बढ़ता है। शिक्षा की कमी से अगली पीढ़ी भी गरीबी में फंस जाती है - यह एक दुष्चक्र बनाता है। आर्थिक रूप से, गरीबी उत्पादकता को कम करती है, उपभोग को प्रभावित करती है, और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को धीमा करती है। सामाजिक दृष्टि से, यह असमानता, अपराध और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ाती है।
५. गरीबी उन्मूलन की रणनीतियां और कार्यक्रम
भारत में गरीबी को कम करने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। मनरेगा (मेहनत नरेगा कर्मचारी गारंटी अधिनियम) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करता है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) वृद्धजनों और विकलांगों को आर्थिक सहायता देता है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) कौशल विकास पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री जन धन योजना वित्तीय समावेशन के माध्यम से गरीबों को सशक्त बनाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- गरीबी दर में कमी: २००४-०५ में भारत की गरीबी दर २७.५% थी जो २०१९-२० में १६.४% रह गई है।
- ग्रामीण-शहरी अंतर: ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर (२०.१%) शहरी क्षेत्रों (१०.२%) से अधिक है।
- राष्ट्रीय आय में वृद्धि: प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में वृद्धि से गरीबी में कमी आई है।
- मानव विकास सूचकांक: भारत का मानव विकास सूचकांक (HDI) २०२१ में १९१ देशों में से १३१वें स्थान पर है।
- बहु-आयामी गरीबी: नीति आयोग के आंकड़े अनुसार भारत में २०१५-१६ में २७.५% लोग बहु-आयामी गरीबी में थे।
- वैश्विक संदर्भ: विश्व बैंक के अनुसार भारत में लगभग १३ करोड़ लोग चरम गरीबी में रहते हैं।
राजस्थान विशेष
राजस्थान की गरीबी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राजस्थान की आबादी का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है। राजस्थान में कम वर्षा, सूखे की स्थिति और रेगिस्तानी इलाकों के कारण कृषि अस्थिर है जो गरीबी को बढ़ाता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा गरीबी में है। पश्चिमी राजस्थान में साक्षरता दर तुलनात्मक रूप से कम है। राजस्थान में आजीविका संसाधनों की सीमितता है। महिला साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम है। राजस्थान में चल रहे कार्यक्रमों में मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, और राजस्थान की अपनी योजनाएं जैसे चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना गरीबी उन्मूलन में भूमिका निभा रही हैं।
परीक्षा पैटर्न
मुख्य परीक्षा में संभावित प्रश्न:
- "भारत में गरीबी रेखा की अवधारणा को समझाइए और विभिन्न समितियों द्वारा प्रस्तावित परिभाषाओं की तुलना कीजिए।" (कम से कम १००-१५० शब्द)
- "भारत में गरीबी के कारणों का विश्लेषण कीजिए और गरीबी उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का आकलन कीजिए।"
- "बहु-आयामी गरीबी सूचकांक क्या है? यह परंपरागत गरीबी माप से कैसे भिन्न है?"
- "राजस्थान विशेष संदर्भ में गरीबी के कारणों और इसे दूर करने के उपायों पर प्रकाश डालिए।"
अग्रिम सेवा परीक्षा में निबंध: "भारत में गरीबी: चुनौतियां और समाधान" जैसे विषय पूछे जाते हैं।
स्मरण युक्तियां
- टेंडुलकर समिति (२००९): शहरी ८४७, ग्रामीण ५६५ रुपये - याद रखें "टेंडुलकर = छोटी राशि"
- रंगराजन समिति (२०१४): शहरी १०००, ग्रामीण ७१० रुपये - याद रखें "रंगराजन = बढ़ी हुई राशि"
- गरीबी दर गिरावट: २००४-०५ में २७.५% से २०१९-२० में १६.४% - लगभग १०% की कमी
- बहु-आयामी गरीबी के तीन आयाम: शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन स्तर (ESL)
- मुख्य योजनाएं: MGNREGA, NRLM, NRLM, PM-JAY, Ayushman Bharat
- राजस्थान की विशेषता: कम वर्षा, सूखे की स्थिति, अनुसूचित जातियों और जनजातियों की अधिक संख्या
- विश्व बैंक की परिभाषा: १.९० अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन से कम आय = चरम गरीबी
- भारतीय दृष्टिकोण: गरीबी = आवश्यक खाद्य और गैर-खाद्य आवश्यकताओं को पूरा न कर पाना