सुधार (Reforms) - आर्थिक सुधार एवं भारतीय अर्थव्यवस्था
परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
सुधार शब्द का अर्थ किसी वर्तमान प्रणाली, नीति या संरचना में सकारात्मक परिवर्तन लाना होता है। अर्थव्यवस्था के संदर्भ में सुधार से तात्पर्य उन नीतियों और कार्यक्रमों से है जो आर्थिक विकास, दक्षता और न्याय में वृद्धि करते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जिन्होंने देश की आर्थिक स्थिति को रूपांतरित किया है।
RPSC RAS परीक्षा में सुधार की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था, राजस्थान की अर्थनीति और आर्थिक विकास नीतियों से सीधा संबंध रखता है। मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के अंतर्गत भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक सुधार, नीति-निर्माण और विकास संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं।
मुख्य अवधारणाएं
१. स्वतंत्रता पूर्व आर्थिक सुधार
भारत में स्वतंत्रता से पहले भी विभिन्न आर्थिक सुधार किए गए। ब्रिटिश शासनकाल में भूमि सुधार, राजस्व प्रणाली में परिवर्तन और बैंकिंग प्रणाली की स्थापना महत्वपूर्ण सुधार थे। बंगाल में स्थायी बंदोबस्त, रैयतवारी प्रणाली और महालवारी प्रणाली भूमि सुधार के उदाहरण थे। इन सुधारों का उद्देश्य राजस्व वसूली में सुधार करना और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना था, किंतु ये भारतीय किसानों के लिए अत्यंत कष्टदायक साबित हुए।
२. स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक सुधार (1947-1991)
स्वतंत्र भारत में अर्थव्यवस्था को समाजवादी सिद्धांतों पर आधारित करने का प्रयास किया गया। कृषि सुधार, भूमि सुधार कानून, जमींदारी प्रणाली का उन्मूलन और सहकारी समितियों की स्थापना मुख्य सुधार थे। औद्योगिक नीति, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग और आयात-निर्यात नीति भी आर्थिक सुधार का हिस्सा थे। लेकिन इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर धीमी रही और "हिंदू दर वृद्धि" के नाम से जानी गई।
३. आर्थिक सुधार 1991 के बाद
1991 में डॉ. मनमोहन सिंह की अगुवाई में भारत ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति अपनाई। यह भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा मोड़ था। इन सुधारों में ब्याज दरों का विनियमन, आयात-निर्यात नीति का उदारीकरण, विदेशी निवेश की अनुमति, सार्वजनिक उद्यमों का विनिवेश और कर संरचना में परिवर्तन शामिल थे। इन सुधारों के परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
४. कर सुधार और बजट प्रबंधन
भारत में कर सुधार का एक लंबा इतिहास है। आय कर, बिक्रय कर, सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क में कई परिवर्तन किए गए हैं। वर्ष 2005 में मूल्य वर्धित कर (VAT) की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कर सुधार था। 1 जुलाई 2017 से भारत में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू किया गया, जो एक व्यापक और एकीकृत कर प्रणाली है। यह सुधार अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
५. कृषि और ग्रामीण विकास सुधार
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, खाद्य सुरक्षा कानून और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी कई योजनाएं कृषि सुधार का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), किसान क्रेडिट कार्ड और मुद्रा योजना जैसी योजनाएं किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए डिजाइन की गई हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
• 1991 का आर्थिक संकट: भारत को 1991 में विदेशी मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उदारीकरण की नीति अपनाई गई।
• उदारीकरण के मुख्य घटक: विदेशी निवेश में वृद्धि, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का विनिवेश, आयात-निर्यात नीति का उदारीकरण और ब्याज दरों में लचीलापन।
• जीएसटी कानून (2016): जीएसटी को 101वें संविधान संशोधन के माध्यम से अनुमोदित किया गया और यह 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ।
• भारत की GDP वृद्धि दर: 2004-2008 के दौरान भारत की GDP वृद्धि दर औसतन 8-9% रही, जिसे "चमकता भारत" युग के रूप में जाना जाता है।
• दिवाला और शोध्यता संहिता (2016): यह कानून दिवालिया कंपनियों के पुनर्गठन और लेनदारों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार है।
• डिजिटल भुगतान सुधार: भारत सरकार द्वारा नकदी रहित अर्थव्यवस्था की दिशा में कई सुधार किए गए हैं, जैसे UPI, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन बैंकिंग।
राजस्थान विशेष
राजस्थान भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र है और यहाँ कई क्षेत्र-विशिष्ट आर्थिक सुधार किए गए हैं। कृषि-प्रधान राजस्थान में हरित क्रांति का प्रभाव सीमित रहा है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में सूक्ष्म सिंचाई और भूमिगत जल उपयोग में सुधार हुए हैं।
पर्यटन, खनिज उद्योग, कपड़ा उद्योग और कृषि आधारित उद्योग राजस्थान की अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ हैं। राजस्थान सरकार द्वारा "राजस्थान इंडस्ट्रियल पॉलिसी" के तहत विभिन्न आर्थिक सुधार लागू किए गए हैं। इनमें निवेशकों को प्रोत्साहन, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, कृषि-निर्यात नीति और पर्यटन विकास शामिल हैं।
राजस्थान में MGNREGA कार्यान्वयन ग्रामीण विकास का एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार रहा है। साथ ही, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, कृषि कल्याण योजनाएं और शिक्षा सुधार भी राजस्थान की आर्थिक प्रगति में योगदान दे रहे हैं।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में "सुधार" विषय से निम्नलिखित प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं:
• प्रारंभिक परीक्षा (CSAT): वस्तुनिष्ठ प्रश्न जहाँ विभिन्न आर्थिक सुधारों की तारीख, प्रमुख व्यक्तित्व और प्रभाव पूछे जाते हैं।
• मुख्य परीक्षा (प्रश्न-पत्र I, II, III): वर्णनात्मक प्रश्न जहाँ आर्थिक सुधारों की पृष्ठभूमि, कारण, कार्यान्वयन और परिणामों का विश्लेषण किया जाता है।
• साक्षात्कार (Interview): सुधार संबंधी समसामयिक मुद्दों पर विचार-विमर्श, जैसे जीएसटी का प्रभाव, डिजिटल अर्थव्यवस्था और राजस्थान में औद्योगिक विकास।
स्मरण युक्तियां
1. समय-रेखा याद रखें: 1947 (स्वतंत्रता), 1956 (औद्योगिक नीति), 1991 (उदारीकरण), 2005 (VAT), 2017 (जीएसटी) - ये मुख्य तारीखें हैं।
2. तीन स्तंभ याद रखें: उदारीकरण = खुली अर्थव्यवस्था, निजीकरण = व्यक्तिगत स्वामित्व, वैश्वीकरण = अंतर्राष्ट्रीय व्यापार।
3. संक्षिप्त नाम याद रखें: PM-KISAN, MGNREGA, UPI, GST, VAT, FDI - ये संक्षिप्त नाम महत्वपूर्ण हैं।
4. क्षेत्रीय प्रभाव याद रखें: हरित क्रांति (पंजाब), श्वेत क्रांति (गुजरात), पर्यटन (राजस्थान)।
5. प्रमुख व्यक्तित्व याद रखें: डॉ. मनमोहन सिंह (1991 सुधार), प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन (हरित क्रांति), डॉ. वर्गीज कुरियन (श्वेत क्रांति)।
6. शब्दावली को परिभाषित करें: Liberalization (मुक्त बाजार), Privatization (निजीकरण), Globalization (वैश्वीकरण), Disinvestment (विनिवेश)।
आर्थिक सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति का मूल आधार हैं। RPSC RAS परीक्षा की तैयारी के दौरान इन सुधारों का गहन अध्ययन करना अत्यावश्यक है। समसामयिक विकास, राजस्थान विशेष और परीक्षा प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए इस विषय को समझना चाहिए।