परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
"कर लगाना" या कराधान भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवयव है। कर लगाना का अर्थ है सरकार द्वारा नागरिकों और व्यवसायों से अनिवार्य रूप से धन संग्रहण करना। RPSC RAS परीक्षा में आर्थिक अवधारणाओं के अंतर्गत कराधान एक प्रमुख विषय है जो सामान्य अध्ययन के विभिन्न खंडों में आता है। इस विषय से न केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्न बल्कि साक्षात्कार में भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं। कर प्रणाली भारतीय राजस्व का मुख्य स्रोत है और राजस्थान की आर्थिक नीति में विशेष भूमिका निभाता है।
मुख्य अवधारणाएं
1. कर की परिभाषा और प्रकृति
कर एक ऐसी अनिवार्य भुगतान है जो सरकार द्वारा नागरिकों और व्यवसायों से वसूल किया जाता है। कर की मुख्य विशेषताएं हैं - यह अनिवार्य है, इसके बदले में प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलता, यह कानून द्वारा निर्धारित है, और यह सार्वजनिक कल्याण के लिए व्यय किया जाता है। कर लगाने की शक्ति केंद्रीय और राज्य सरकारों को संविधान द्वारा प्रदान की गई है। कर की अनिवार्य प्रकृति इसे दान या सहायता से अलग करती है, क्योंकि कर देना एक कानूनी अपरिहार्यता है।
2. कर के मुख्य उद्देश्य
कर लगाने के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं। प्रथम, राजस्व संग्रहण - सरकारी आय के लिए धन एकत्रित करना। द्वितीय, आर्थिक नियंत्रण - मुद्रास्फीति और मंदी को नियंत्रित करना। तृतीय, सामाजिक नीति - आय के वितरण में समानता लाना और असमानता को कम करना। चतुर्थ, विकास - बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करना। पंचम, नियामक भूमिका - कुछ वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग को नियंत्रित करना। राजस्थान में कर राजस्व का उपयोग मुख्यतः कृषि विकास, पर्यटन और बुनियादी ढांचे में होता है।
3. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर
प्रत्यक्ष कर वह है जो प्रत्यक्ष रूप से नागरिक या व्यवसायी से सरकार को दिया जाता है। इसमें आयकर, निगम कर, संपत्ति कर और कृषि आय कर आते हैं। प्रत्यक्ष कर में कर देने वाला और कर वहन करने वाला एक ही व्यक्ति होता है। दूसरी ओर, अप्रत्यक्ष कर वह है जो किसी वस्तु या सेवा पर लगाया जाता है और आमतौर पर उपभोक्ता द्वारा अदा किया जाता है। इसमें वस्तु और सेवा कर (GST), उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क आते हैं। अप्रत्यक्ष कर में कर देने वाला और कर वहन करने वाला अलग व्यक्ति होता है।
4. भारतीय कर प्रणाली की संरचना
भारतीय संविधान के अनुसार कर लगाने की शक्ति केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच विभाजित है। केंद्र सरकार आयकर, निगम कर, सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगा सकती है। राज्य सरकारें वस्तु और सेवा कर का अपना हिस्सा, स्टांप ड्यूटी और संपत्ति कर लगा सकती हैं। वर्ष 2017 में वस्तु और सेवा कर (GST) का कार्यान्वयन एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था जिसने भारतीय कर प्रणाली को एकीकृत किया। स्थानीय निकाय जैसे नगर पालिका और पंचायतें भी स्थानीय कर लगा सकते हैं।
5. कर नीति के सिद्धांत
एडम स्मिथ द्वारा प्रतिपादित कर के प्रमुख सिद्धांत हैं। प्रथम, निश्चितता का सिद्धांत - कर की राशि, समय और विधि निश्चित और ज्ञात होनी चाहिए। द्वितीय, सुविधा का सिद्धांत - कर को ऐसे समय पर लगाया जाना चाहिए जब नागरिक के पास भुगतान करने की सुविधा हो। तृतीय, न्यायसंगतता का सिद्धांत - कर का वितरण न्यायसंगत होना चाहिए और सभी को समान रूप से प्रभावित करना चाहिए। चतुर्थ, मितव्ययिता का सिद्धांत - कर संग्रहण का खर्च उचित होना चाहिए। इन सिद्धांतों के आधार पर ही आधुनिक कर नीति तैयार की जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
भारतीय कर राजस्व की संरचना: भारत की कुल राजकोषीय आय में कर राजस्व का हिस्सा लगभग 85-90% है। आयकर और निगम कर केंद्रीय कर राजस्व के मुख्य स्रोत हैं, जबकि GST राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण आय स्रोत बन गया है।
GST का कार्यान्वयन: 1 जुलाई 2017 को वस्तु और सेवा कर (Goods and Services Tax) लागू किया गया। यह एक अप्रत्यक्ष कर है जो 5%, 12%, 18% और 28% की दरों पर लगाया जाता है। GST ने भारतीय कर प्रणाली को सरल और एकीकृत बनाया।
कर अनुपालन: भारत में कर अनुपालन की दर विकसित देशों की तुलना में कम है। सरकार डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से कर अनुपालन को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है।
कर छूट और प्रोत्साहन: भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए कर छूट प्रदान करती है।
राजस्थान विशेष
राजस्थान में कर राजस्व का स्वरूप विशेष है क्योंकि यह एक कृषि-प्रधान राज्य है। राजस्थान में कर राजस्व के मुख्य स्रोत हैं - GST, स्टांप ड्यूटी, बिक्री कर, पर्यटन कर और संपत्ति कर। राजस्थान की कृषि आय पर कर नहीं लगाया जाता है, जो राजस्थान सरकार के राजस्व को प्रभावित करता है।
राजस्थान सरकार ने व्यवसा (वाणिज्य कर) को समाप्त कर दिया है और अब GST के तहत राजस्व एकत्रित करती है। राजस्थान में पर्यटन एक महत्वपूर्ण कर राजस्व स्रोत है, विशेषकर जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जिलों में। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास के लिए विभिन्न कर छूटें और प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में कराधान से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित तरीकों से पूछे जाते हैं:
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): इसमें वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं जैसे कर की परिभाषा, कर के प्रकार, GST की दरें, भारतीय कर प्रणाली की संरचना और राजस्थान से संबंधित कर प्रश्न।
मुख्य परीक्षा (Mains): इसमें निबंधात्मक प्रश्न आते हैं जैसे भारतीय कर प्रणाली में सुधार, कर न्यायिकता, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के बीच अंतर, और भारत में कर अनुपालन की समस्याएं।
साक्षात्कार (Interview): साक्षात्कार में कर नीति, आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्मरण युक्तियां
कर के प्रकार याद रखने के लिए: "ICCEG" - Income Tax, Corporate Tax, Customs, Excise, GST याद रखें। ये मुख्य संघीय कर हैं।
GST दरें: "5-12-18-28" - यह GST की चार मुख्य दरें हैं। आवश्यक वस्तुओं पर 5%, सामान्य वस्तुओं पर 12% और 18%, और विलासिता की वस्तुओं पर 28%।
कर के सिद्धांत: "CSNE" - Certainty, Suitability, Neutral, Economic याद रखें।
कर नीति के उद्देश्य: "RSDC" - Revenue (राजस्व), Social Justice (सामाजिक न्याय), Development (विकास), Control (नियंत्रण)।
राजस्थान के कर स्रोत याद रखें: GST > स्टांप ड्यूटी > संपत्ति कर > पर्यटन कर इसी क्रम में महत्वपूर्ण हैं।
कराधान एक जटिल विषय है लेकिन इसे क्रमबद्ध तरीके से समझने से RPSC परीक्षा में सफलता मिल सकती है। नियमित अभ्यास और वर्तमान घटनाओं पर ध्यान रखने से इस विषय में दक्षता प्राप्त की जा सकती है।