परिचय
राजस्थान में पाँच लोक देवताओं को "पंचपीर" कहते हैं: रामदेवजी, गोगाजी, पाबूजी, हड़बूजी और मेहाजी।
रामदेवजी (रामसा पीर)
जन्म: 1405 ई., पोकरण (जैसलमेर) के पास। वंश: तँवर राजपूत। माता: मैणादे। पत्नी: नेतलदे। समाधि: रामदेवरा (रुणिचा), 1458 ई. हिंदू और मुस्लिम दोनों पूजते हैं — "रामसा पीर।" भक्त: कामड़ जाति — तेरहताली नृत्य। प्रतीक: लकड़ी का घोड़ा। घोड़ा: नीला "लीला।"
गोगाजी (गोगा पीर)
जन्म: 10वीं सदी, ददरेवा (चुरू)। चौहान राजपूत। माता: बाछलदे। समाधि: गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)। "साँपों के देवता" और "जाहरपीर।"
पाबूजी
जन्म: 14वीं सदी, कोलू (फलोदी, जोधपुर)। राठौड़ राजपूत। "ऊँट के देवता।" भक्त: रेबारी (राइका) जाति। पाबूजी की फड़ — सबसे लंबी फड़।
तेजाजी
जन्म: 1074 ई., खड़नाल (नागौर)। जाट (नागवंशी)। मृत्यु: 1103 ई., सेंदरिया (अजमेर) — साँप से। "कृषि और पशुपालन के देवता।" जाट समाज के प्रमुख देवता। प्रमुख मेला: परबतसर (नागौर)। भाद्रपद शुक्ल 10 = तेजा दशमी।
RAS Prelims में महत्व
पंचपीर के पाँचों नाम। रामदेवजी = रामसा पीर = कामड़ जाति। गोगाजी = जाहरपीर। पाबूजी = ऊँट देवता। तेजाजी = कृषि देवता। परनेत = तेजाजी उपचार — परीक्षा में आता है।