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संघवाद (फेडरलिज्म) - RPSC RAS परीक्षा अध्ययन गाइड

Federalism: RPSC RAS Exam Guide

12 मिनटintermediate· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

संघवाद भारतीय संविधान की एक मौलिक विशेषता है जो भारत के राजनीतिक ढांचे को परिभाषित करती है। RPSC RAS परीक्षा में संघवाद एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह केंद्र-राज्य संबंधों, शक्तियों के विभाजन और भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद को समझने के लिए आवश्यक है। परीक्षा में इस विषय से सामान्यतः 4-6 प्रश्न पूछे जाते हैं, जो प्रिलिम्स और मेन्स दोनों परीक्षाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य अवधारणाएं

1. संघवाद की परिभाषा और विशेषताएं

संघवाद एक राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें सत्ता केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच विभाजित होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को "राज्यों का संघ" (Union of States) कहा गया है। संघवादी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं हैं - लिखित संविधान, कानूनी सर्वोच्चता, शक्तियों का विभाजन, स्वतंत्र न्यायपालिका, और दो स्तरीय सरकार। भारत का संघवाद अनम्य और अखंडनीय है, जिसका अर्थ है कि राज्य संघ से अलग नहीं हो सकते।

2. शक्तियों का विभाजन - तीन सूचियां

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में किया गया है। संघ सूची (केंद्रीय सूची) में 97 विषय हैं जैसे विदेश नीति, रक्षा, मुद्रा और डाक सेवा। राज्य सूची में 66 विषय हैं जैसे पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि। समवर्ती सूची में 47 विषय हैं जहां केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, जैसे विवाह, समाचार पत्र, विद्युत और आपराधिक कानून। केंद्र को समवर्ती सूची में प्रधानता दी गई है।

3. केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 268-293 में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों का वर्णन है। कर संग्रह को दो श्रेणियों में बांटा गया है - संघीय कर (जो केंद्र एकत्र करता है) और राज्य कर (जो राज्य एकत्र करते हैं)। राजस्व साझाकरण व्यवस्था के तहत केंद्र को राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करनी होती है। वित्त आयोग, जो हर पांच साल बाद गठित होता है, केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण की सिफारिश करता है। वर्तमान में 16वां वित्त आयोग (2026-2031) कार्य करेगा।

4. राष्ट्रीय और आपातकालीन प्रावधान

भारतीय संविधान राष्ट्रीय हित में संघवादी व्यवस्था को लचीला बनाता है। राष्ट्रपति को तीन प्रकार की आपातकालीन शक्तियां दी गई हैं - अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल), अनुच्छेद 356 (राज्य आपातकाल) और अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल)। राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान केंद्र को राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बनाने की शक्ति दी जा सकती है। अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति किसी राज्य की सरकार को बर्खास्त कर सकता है यदि उसे लगता है कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर रही है।

5. अंतर-राजकीय परिषद और सहकारी संघवाद

अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय विकास परिषद और अंतर-राजकीय परिषद (Inter-State Council) का गठन कर सकता है। सहकारी संघवाद की अवधारणा केंद्र और राज्यों को एक-दूसरे के साथ सहयोगात्मक तरीके से काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। नीति आयोग इसी सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए 2015 में योजना आयोग की जगह लिया गया। राज्य सरकारें और केंद्र सरकार विभिन्न संयुक्त समितियों और सम्मेलनों के माध्यम से सहयोग करती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

• अनुच्छेद 1: भारत को "राज्यों का संघ" (Union of States) के रूप में परिभाषित करता है।

• अनुच्छेद 73-162: केंद्र और राज्यों की विधायी और कार्यकारी शक्तियों का विवरण देते हैं।

• सातवीं अनुसूची: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में विषयों का विभाजन करती है।

• सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका: संघीय विवादों का निर्णय करता है और संविधान की व्याख्या करता है।

• संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन केंद्र और राज्यों की सहमति से होता है।

• राज्यों की संख्या: वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं।

राजस्थान विशेष

राजस्थान RPSC परीक्षा का केंद्रबिंदु है, इसलिए संघवाद के संदर्भ में राजस्थान की भूमिका समझना आवश्यक है। राजस्थान भारत में संघवाद के एक जीवंत उदाहरण के रूप में कार्य करता है। राजस्थान का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था जब भारत संघ के साथ इसका पूर्ण एकीकरण संपन्न हुआ। राजस्थान की अपनी राज्य सरकार है जो केंद्रीय सरकार के साथ संघीय संबंध बनाए रखती है।

राजस्थान की विधानसभा में 200 सदस्य हैं और राज्य सभा में 10 सदस्य हैं। राजस्थान कृषि, खनिज संसाधन, पर्यटन और पशुपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ये सभी राज्य सूची के विषय हैं। राजस्थान के वित्तीय संबंध में केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि और राजस्व साझाकरण महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान के मुख्य राजस्व स्रोत भूमि राजस्व, बिक्री कर, और पशु कर हैं।

परीक्षा पैटर्न

प्रिलिम्स परीक्षा में: संघवाद से आमतौर पर 2-3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। ये प्रश्न शक्तियों के विभाजन, सूचियों, महत्वपूर्ण अनुच्छेद और संघवाद की विशेषताओं पर केंद्रित होते हैं। उत्तर एक-पंक्ति के होते हैं और सटीकता महत्वपूर्ण है।

मेन्स परीक्षा में: संघवाद से 2-3 निबंधात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। ये प्रश्न विश्लेषणात्मक होते हैं जैसे "भारतीय संघवाद की विशेषताओं की व्याख्या करें" या "केंद्र-राज्य संबंधों में सहकारी संघवाद की भूमिका पर चर्चा करें।" उत्तर संरचित, तार्किक और उदाहरण सहित होने चाहिए।

स्मरण युक्तियां

• सूचियों को याद रखने के लिए: संघ सूची = 97 (केंद्र की सर्वाधिक शक्ति), राज्य सूची = 66 (राज्य का क्षेत्र), समवर्ती = 47 (दोनों मिलकर)।

• तीन आपातकालीन स्थितियां: अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय), 356 (राज्य), 360 (वित्तीय) - याद रखने के लिए इसे "राष्ट्रीय-राज्य-वित्त" क्रम में सोचें।

• वित्त आयोग: हर 5 साल बाद गठित होता है। वर्तमान 15वां आयोग 2021-2026 अवधि के लिए है।

• राजस्थान का गठन: 1 नवंबर 1956 - इसी दिन राजस्थान दिवस मनाया जाता है।

• महत्वपूर्ण अनुच्छेद: अनुच्छेद 1, 73, 162, 263, 352, 356, 360, 368 को विशेष महत्व दें।

• केस स्टडी: राष्ट्रीय आपातकाल (1975-1977) और अनुच्छेद 356 के विभिन्न उपयोग को समझें क्योंकि परीक्षा में व्यावहारिक उदाहरण पूछे जा सकते हैं।

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