संसद - भारतीय संविधान के अनुसार
परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
संसद भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्र की सर्वोच्च विधायी संस्था है। RPSC RAS परीक्षा में संसद से संबंधित प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह भारतीय राजनीतिक प्रणाली का मूल आधार है। संसद का अध्ययन भारतीय संविधान के अध्याय 12 में विस्तार से किया गया है। RAS परीक्षा में संसद से निम्नलिखित विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं: - संसद की संरचना और गठन - संसद की शक्तियां और कार्य - संसद के सदन (लोकसभा और राज्यसभा) - संसद की प्रक्रिया और नियम - संविधान संशोधन में संसद की भूमिका - भारतीय संसद का इतिहास और विकास यह अध्ययन राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए भी आवश्यक है क्योंकि राज्य की विधानसभा संसदीय प्रणाली पर आधारित है।
मुख्य अवधारणाएं
1. संसद की परिभाषा और संरचना
संसद भारत की सर्वोच्च विधायी शक्ति है जिसमें राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 79 में संसद की परिभाषा दी गई है। संसद को "संघीय विधानमंडल" भी कहा जाता है। लोकसभा को निचला सदन (Lower House) और राज्यसभा को उच्च सदन (Upper House) कहा जाता है। वर्तमान समय में लोकसभा में 545 सदस्य हैं (530 राज्यों से + 13 संघ राज्य क्षेत्रों से + 2 आंग्ल-भारतीय) और राज्यसभा में 245 सदस्य हैं (233 राज्यों से + 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत)।
2. लोकसभा की विशेषताएं
लोकसभा भारतीय संसद का लोकप्रिय सदन है। इसके सदस्य सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage) के आधार पर सीधे चुने जाते हैं। लोकसभा की अधिकतम अवधि 5 वर्ष होती है। लोकसभा के सदस्यों को "सांसद" (Member of Parliament - MP) कहा जाता है। किसी को लोकसभा का सदस्य बनने के लिए भारतीय नागरिक होना चाहिए, न्यूनतम 25 वर्ष की आयु होनी चाहिए, और वह पागल या दिवालिया न हो। लोकसभा में सबसे अधिक सदस्यों वाली पार्टी सरकार बनाती है।
3. राज्यसभा की विशेषताएं
राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है। इसके सदस्य राज्य की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं। राज्यसभा के 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा क्षेत्रों से मनोनीत किए जाते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। प्रत्येक 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं। राज्यसभा के सदस्य बनने के लिए न्यूनतम 30 वर्ष की आयु होनी चाहिए।
4. संसद की शक्तियां
संसद को व्यापक विधायी शक्तियां दी गई हैं। संविधान के अनुच्छेद 245 और 246 में संसद की विधायी क्षमता का वर्णन किया गया है। संसद निम्नलिखित विषयों पर कानून बना सकती है: - संघीय सूची के सभी विषय (अनुच्छेद 246) - समवर्ती सूची के विषय (राज्य विधानमंडल के साथ) - आपातकाल के दौरान राज्य सूची के विषय भी संसद राष्ट्रपति का निर्वाचन करती है, अविश्वास प्रस्ताव पास कर सरकार को गिरा सकती है, महाभियोग के माध्यम से राष्ट्रपति को हटा सकती है, और संविधान में संशोधन कर सकती है (अनुच्छेद 368)।
5. संसद की कार्य प्रक्रिया
संसद की कार्य प्रक्रिया को नियमित करने के लिए दोनों सदनों के "नियमावली" (Rules of Procedure) हैं। संसद सत्र वर्ष में तीन बार आयोजित किए जाते हैं: - बजट सत्र (फरवरी से अप्रैल) - मानसून सत्र (जुलाई से अगस्त) - शीतकालीन सत्र (नवंबर से दिसंबर) विधेयक तीन पाठ (reading) से गुजरते हैं। प्रश्नकाल (Question Hour) संसद की कार्यवाही का महत्वपूर्ण अंग है जहां सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं। शून्यकाल (Zero Hour) में सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा होती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
संसद का पहला सत्र: 26 जनवरी 1950 को भारत के संविधान के लागू होने के बाद संसद का पहला सत्र शुरू हुआ। लोकसभा का वर्तमान पीठासीन अधिकारी: अध्यक्ष (Speaker) लोकसभा के सदस्यों द्वारा चुना जाता है। राज्यसभा का सभापति: भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति (ex-officio Chairman) होते हैं। विधेयक के प्रकार: धन विधेयक (Money Bill), वित्तीय विधेयक (Financial Bill) और साधारण विधेयक (Ordinary Bill)। अनुच्छेद 109: धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं। अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा दी गई है। संसद की भाषा: हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का प्रयोग संसद में होता है।
राजस्थान विशेष
राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था भारतीय संसदीय प्रणाली पर आधारित है। राजस्थान के प्रतिनिधित्व के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें: लोकसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व: राजस्थान से 25 लोकसभा सदस्य निर्वाचित होते हैं। राजस्थान का राज्य काफी बड़ा है और इसकी जनसंख्या भी अधिक है। मुख्य लोकसभा क्षेत्र जयपुर, दिल्ली, अजमेर, अलवर आदि हैं। राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व: राजस्थान से 10 राज्यसभा सदस्य राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। राजस्थान विधानसभा: राजस्थान की राज्य विधानसभा में 200 सदस्य होते हैं, जो संसद की संरचना का अनुकरण करते हैं। विधानसभा का कार्य संसद जैसा ही है। ऐतिहासिक महत्व: जयपुर को भारतीय संसद की एक प्रमुख राजनीतिक गतिविधि का केंद्र माना जाता है। राजस्थान के कई प्रमुख नेता राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में संसद से संबंधित प्रश्नों का पैटर्न निम्नलिखित है: प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): इसमें 1-2 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्य ज्ञान और भारतीय संविधान से संबंधित प्रश्न आते हैं। मुख्य परीक्षा (Mains): इसमें संसद के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों से संसद की शक्तियों, संरचना, कार्य प्रक्रिया आदि के बारे में विस्तार से लिखने की अपेक्षा की जाती है। साक्षात्कार (Interview): साक्षात्कार में संविधान और राजनीतिक प्रणाली से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। सामान्य प्रश्न: - संसद में कितने सदन हैं? - लोकसभा के सदस्यों की संख्या कितनी है? - राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल कितना है? - संविधान के किस अनुच्छेद में संसद की परिभाषा दी गई है? - धन विधेयक किस सदन में पहले पेश किए जाते हैं?
स्मरण युक्तियां
संसद की संरचना को याद रखने का तरीका: संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा। इसे "राष्ट्रपति + निचला सदन + उच्च सदन" के रूप में याद रखें। सदस्य संख्या का स्मरण: लोकसभा में 545 सदस्य (530+13+2), राज्यसभा में 245 सदस्य (233+12)। "5" और "2" याद रखें - लोकसभा के लिए, और "2" और "4" राज्यसभा के लिए। कार्यकाल का अंतर: लोकसभा 5 वर्ष (आम चुनाव), राज्यसभा 6 वर्ष (स्थायी)। चुनाव का तरीका: लोकसभा = प्रत्यक्ष (Direct), राज्यसभा = अप्रत्यक्ष (Indirect) + 12 मनोनीत। आयु की आवश्यकता: लोकसभा = 25 वर्ष, राज्यसभा = 30 वर्ष। महत्वपूर्ण अनुच्छेद: - अनुच्छेद 79 = संसद की परिभाषा - अनुच्छेद 245-246 = विधायी शक्तियां - अनुच्छेद 109-110 = धन विधेयक - अनुच्छेद 368 = संविधान संशोधन संसद सत्र को याद रखने का तरीका: "बी-एम-शी" (Budget-Monsoon-Winter) - बजट सत्र, मानसून सत्र, शीतकालीन सत्र। प्रश्न काल और शून्य काल: "प्रश्न काल" संसद की कार्यवाही का नियमित अंग है जहां औपचारिक प्रश्न पूछे जाते हैं। "शून्य काल" में अप्रत्याशित और सार्वजनिक महत्व के विषयों पर चर्चा होती है।