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RAS Prelims 2026 — तैयारी जारी रखें
📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

प्रधान मंत्री - RPSC RAS परीक्षा अध्ययन मार्गदर्शिका

Prime Minister - Indian Constitution Study Guide for RPSC RAS

12 मिनटintermediate· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

प्रधान मंत्री भारतीय संविधान के अनुसार भारत के राष्ट्रीय कार्यकारिणी का प्रमुख होता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित RAS परीक्षा में भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और शासन से संबंधित प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्रधान मंत्री की भूमिका, शक्तियाँ और कार्य परीक्षा के मुख्य विषय हैं। इस विषय से प्रायः 4-6 अंकों के प्रश्न प्रश्नपत्र में आते हैं। RAS परीक्षा की तैयारी करते समय संविधान के भाग V (कार्यपालिका) को विशेष ध्यान देना आवश्यक है, जिसमें प्रधान मंत्री से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रावधान दिए गए हैं।

मुख्य अवधारणाएं

प्रधान मंत्री की परिभाषा और नियुक्ति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 में प्रधान मंत्री से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। प्रधान मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। संविधान में कहा गया है कि जिस व्यक्ति को राष्ट्रपति प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त करता है, वह लोक सभा का सदस्य होना चाहिए या नियुक्ति के छः महीने के भीतर लोक सभा का सदस्य बन जाना चाहिए। सामान्यतः जो दल लोक सभा में बहुमत प्राप्त करता है, उसका नेता प्रधान मंत्री बनता है। यह संवैधानिक रीति-रिवाज है, संविधान में स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है।

प्रधान मंत्री की योग्यताएं

संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, प्रधान मंत्री के लिए निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं: (1) भारत का नागरिक होना चाहिए, (2) कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए, (3) लोक सभा का सदस्य होना चाहिए या सदस्य बन सकने की योग्यता रखता हो, (4) केंद्रीय कार्यपालिका के अधीन कोई सरकारी लाभ का पद धारण नहीं करना चाहिए, (5) विकृत मन का व्यक्ति न हो। ये योग्यताएं विभिन्न परीक्षाओं में प्रायः पूछी जाती हैं।

प्रधान मंत्री की शक्तियाँ और कार्य

प्रधान मंत्री केंद्रीय कार्यपालिका का प्रमुख है। उसे व्यापक शक्तियाँ दी गई हैं जिनमें मंत्रिमंडल का गठन करना, महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेना, राष्ट्रपति को परामर्श देना, और सरकार के सभी मामलों का समन्वय करना शामिल है। वह पार्टी के नेता के रूप में भी कार्य करता है। प्रधान मंत्री सरकार के नीतियों का प्रधान प्रवक्ता है और संसद में सरकार की जवाबदेही का प्रमुख व्यक्ति है। मंत्रियों की नियुक्ति, विभागों का आवंटन, और मंत्रियों को हटाने की शक्ति भी प्रधान मंत्री के पास होती है।

प्रधान मंत्री का कार्यकाल और हटाए जाने की प्रक्रिया

प्रधान मंत्री का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, लेकिन वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी समय त्यागपत्र दे सकता है। प्रधान मंत्री को हटाने के लिए लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होना चाहिए। आमतौर पर जब कोई राजनीतिक दल लोक सभा में बहुमत खो देता है, तो प्रधान मंत्री त्यागपत्र दे देता है। संविधान में प्रधान मंत्री को हटाने की कोई विशेष प्रक्रिया नहीं दी गई है। प्रधान मंत्री संसद के दोनों सदनों में व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होता है।

प्रधान मंत्री के आवास और सुरक्षा

भारत के प्रधान मंत्री का सरकारी आवास नई दिल्ली में 7 राज पथ (वर्तमान में 7 लक्ष्मी नारायण शर्मा मार्ग) पर स्थित है। इसे प्रायः "प्रधान मंत्री कार्यालय" के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय सुरक्षा बल (SPG) प्रधान मंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। प्रधान मंत्री को राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के समान राज्य समारोह में सम्मान दिया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

• भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे (1947-1964)

• सबसे लंबे समय तक प्रधान मंत्री रहने वाले व्यक्ति भी पंडित नेहरू हैं (17 वर्ष)

• भारतीय इतिहास में केवल एक महिला प्रधान मंत्री रहीं - इंदिरा गांधी (1966-77, 1980-84)

• प्रधान मंत्री को संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 के अंतर्गत शक्तियाँ दी गई हैं

• राष्ट्रपति के सभी कार्यकारी कार्य प्रधान मंत्री की सलाह पर किए जाते हैं

• प्रधान मंत्री मंत्रिमंडल के 30 से अधिक सदस्यों का नेतृत्व नहीं करता

• मंत्रिपरिषद् का प्रमुख प्रधान मंत्री ही होता है

राजस्थान विशेष

राजस्थान से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी RAS परीक्षा के लिए प्रासंगिक है। राजस्थान के राज्यपाल भारत के राष्ट्रपति की ओर से राज्य में कार्यकारी प्राधिकार का प्रयोग करते हैं। भारतीय संविधान लागू होने के बाद राजस्थान का एकीकरण 1950-56 के दौरान हुआ। राजस्थान को वर्तमान में 33 जिलों में विभाजित किया गया है। केंद्रीय स्तर पर प्रधान मंत्री की शक्तियाँ राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री के पास होती हैं। भारतीय संघ में शक्तियों का विभाजन संविधान के अनुसूचियों में दिया गया है। राजस्थान में शासन की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुसार की जाती है।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है: (1) प्रारंभिक परीक्षा - इसमें 150 प्रश्न, 200 अंक, 2.5 घंटे की समय अवधि होती है। (2) मुख्य परीक्षा - इसमें 4 प्रश्नपत्र होते हैं, कुल 600 अंक। (3) साक्षात्कार - इसमें 100 अंक होते हैं। प्रधान मंत्री से संबंधित प्रश्न प्रारंभिक परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं। मुख्य परीक्षा में भारतीय राजनीति और शासन प्रणाली से संबंधित लंबे उत्तरीय प्रश्न आते हैं। प्रायः "प्रधान मंत्री की शक्तियाँ", "मंत्रिमंडल का गठन", "संवैधानिक स्थिति" जैसे विषय परीक्षा में पूछे जाते हैं।

स्मरण युक्तियां

प्रधान मंत्री से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने के लिए निम्नलिखित तरीकों का उपयोग करें:

• "PM-75" - प्रधान मंत्री के लिए संविधान के अनुच्छेद 75 को याद करें

• "35-PM" - प्रधान मंत्री के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष है

• "LS-PM" - प्रधान मंत्री लोक सभा का सदस्य होना चाहिए

• "5-YEAR" - प्रधान मंत्री का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है

• "COUNCIL" - कार्यकारी परिषद् का नेता प्रधान मंत्री है

• "NEHRUVIAN ERA" - भारत का पहला और सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला प्रधान मंत्री नेहरू

• "PARLIAMENTARY" - प्रधान मंत्री संसदीय प्रणाली में मुख्य कार्यकारी है

• "MAJORITY" - प्रधान मंत्री को लोक सभा में बहुमत की आवश्यकता होती है

अंत में, प्रधान मंत्री की संवैधानिक स्थिति, शक्तियाँ और कार्य को समझना RAS परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संविधान के मूल प्रावधानों को अच्छी तरह से पढ़ें और विभिन्न प्रधान मंत्रियों के कार्यकाल को भी याद रखें।

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