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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

संघ कार्यकारिणी - RPSC RAS परीक्षा अध्ययन मार्गदर्शिका

Union Executive - Complete Study Guide for RPSC RAS

12 मिनटintermediate· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

संघ कार्यकारिणी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 से 365 तक में वर्णित राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् को सम्मिलित रूप से कहा जाता है। यह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की सर्वोच्च कार्यपालिका है जो देश की नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन करती है। RPSC की RAS परीक्षा में संघ कार्यकारिणी से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं क्योंकि यह भारतीय संविधान और राजनीतिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है। इसकी विस्तृत समझ प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्य अवधारणाएं

राष्ट्रपति - राज्य का प्रमुख

राष्ट्रपति भारतीय संघ का संवैधानिक प्रमुख है। संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष विधि से निर्वाचक मंडल द्वारा होता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य और राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल होते हैं। राष्ट्रपति की योग्यताओं में भारतीय नागरिक होना, 35 वर्ष की आयु पूरी करना, संसद का सदस्य न होना तथा किसी लाभकारी पद पर न होना आवश्यक है। राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और वह दोबारा चुनाव के लिए योग्य होता है। संविधान अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति को राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू करने की शक्ति है।

उपराष्ट्रपति - सहायक और राज्यसभा का सभापति

उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च पद होता है। संविधान के अनुच्छेद 63 में उपराष्ट्रपति का विवरण दिया गया है। उपराष्ट्रपति का प्रमुख कार्य राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करना है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है। उपराष्ट्रपति की योग्यताएं राष्ट्रपति से लगभग समान हैं परंतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष के बजाय 35 वर्ष है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल भी 5 वर्ष का होता है। राष्ट्रपति के आकस्मिक निधन या त्यागपत्र की स्थिति में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।

प्रधानमंत्री - कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख

प्रधानमंत्री भारतीय संघ की कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है। संविधान के अनुच्छेद 74 में प्रधानमंत्री की स्थिति का विवरण दिया गया है। प्रधानमंत्री का चुनाव राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, साधारणतः लोकसभा के बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है। प्रधानमंत्री की योग्यताओं में भारतीय नागरिक होना, 25 वर्ष की आयु पूरी करना तथा संसद का सदस्य होना आवश्यक है। प्रधानमंत्री के पास सभी मंत्रियों की नियुक्ति, निलंबन और पदमुक्ति की शक्ति होती है। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद् के बीच मध्यस्थ होता है।

मंत्रिपरिषद् - सामूहिक दायित्व का सिद्धांत

मंत्रिपरिषद् प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रियों का समूह होता है। संविधान के अनुच्छेद 75 में मंत्रिपरिषद् का विवरण दिया गया है। मंत्रिपरिषद् की कुल संख्या सीमित होती है - लोकसभा की कुल संख्या का 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। मंत्रिपरिषद् तीन श्रेणियों में विभाजित होती है: कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री। मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति जवाबदेह होती है। संविधान का अनुच्छेद 75(3) यह सुनिश्चित करता है कि मंत्री लोकसभा का विश्वास खोने पर अपने पद से हट जाते हैं।

संघ कार्यकारिणी की शक्तियां और कार्य

संघ कार्यकारिणी के पास संवैधानिक, विधायी, प्रशासनिक और आपातकालीन शक्तियां होती हैं। ये शक्तियां आमतौर पर राष्ट्रपति के नाम से परंतु प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् की सलाह से प्रयोग की जाती हैं। संघ कार्यकारिणी को अनुचित दबाव से बचाने के लिए संविधान में आपातकालीन प्रावधान किए गए हैं। राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल घोषित करने की शक्ति राष्ट्रपति को है परंतु व्यावहारिक रूप से ये निर्णय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् द्वारा लिए जाते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

• राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है और वह दोबारा चुनाव के लिए योग्य होता है। • उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का पदेन सभापति बनाया जाता है। • प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। • कैबिनेट मंत्री मंत्रिपरिषद् के सबसे वरिष्ठ सदस्य होते हैं। • संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया जा सकता है। • अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लागू होता है। • अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल घोषित किया जा सकता है।

राजस्थान विशेष

राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था भी केंद्रीय संघ कार्यकारिणी के समान सिद्धांतों पर आधारित है। राजस्थान का राज्यपाल केंद्रीय राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है जो आमतौर पर विधानसभा में बहुमत वाले दल का नेता होता है। राजस्थान के मंत्रिमंडल की संरचना और कार्यप्रणाली संघीय मंत्रिपरिषद् के समान होती है। RPSC परीक्षा में राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में विशेष प्रश्न पूछे जाते हैं जो संघीय व्यवस्था से संबंधित होते हैं।

परीक्षा पैटर्न

RPSC की RAS परीक्षा में संघ कार्यकारिणी से संबंधित प्रश्न आमतौर पर निम्नलिखित रूप में पूछे जाते हैं: • राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियों के बारे में बहु-विकल्पीय प्रश्न। • संवैधानिक प्रावधानों के बारे में तथ्यात्मक प्रश्न। • आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित प्रश्न। • मंत्रिपरिषद् की संरचना और कार्यप्रणाली पर प्रश्न। • राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित विशेष प्रश्न।

स्मरण युक्तियां

• **राष्ट्रपति की शक्तियां**: "राष्ट्रपति" शब्द याद रखें - यह संवैधानिक, राजनयिक, सामरिक और अन्य सभी प्रमुख शक्तियां संदर्भित करता है। • **कार्यकाल**: 5-5 वर्ष - राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का कार्यकाल याद रखें। • **न्यूनतम आयु**: प्रधानमंत्री 25, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 35 - यह क्रम याद रखें। • **आपातकाल के अनुच्छेद**: 352 (राष्ट्रीय), 356 (राज्य), 360 (वित्तीय) - याद रखने के लिए इन्हें क्रमबद्ध करें। • **मंत्रिपरिषद् की सीमा**: 15% नियम - लोकसभा के सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक मंत्री नहीं हो सकते। • **सामूहिक दायित्व**: मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह होती है - यह सिद्धांत केंद्रीय है।

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