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मेवाड़ वंश — राजस्थान का गौरव

Mewar Dynasty — The Pride of Rajasthan

15 मिनटintermediate· History, Art, Culture, Literature, Tradition & Heritage of Rajasthan

परिचय

मेवाड़ वंश राजस्थान का सबसे प्राचीन और गौरवशाली राजवंश है। इसकी स्थापना गुहिल (गुहादित्य) ने 566 ई. में की थी। बाद में यह सिसोदिया वंश के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़गढ़ थी — भारत का सबसे बड़ा किला।

मुख्य शासक

बप्पा रावल (734–753 ई.)

मेवाड़ के वास्तविक संस्थापक। अरब आक्रमणकारियों को पराजित किया। चित्तौड़गढ़ किले का निर्माण कराया।

राणा कुम्भा (1433–1468 ई.)

32 किलों का निर्माण, जिसमें कुम्भलगढ़ प्रमुख है। 1437 ई. में मालवा के सुल्तान को हराकर कीर्ति स्तंभ बनवाया। संगीत राज की रचना की।

राणा सांगा (1508–1528 ई.)

खानवा का युद्ध (1527 ई.) — राणा सांगा बनाम बाबर। राणा सांगा की पराजय।

महाराणा प्रताप (1572–1597 ई.)

अकबर की अधीनता अस्वीकार की। हल्दीघाटी का युद्ध (1576 ई.) — प्रताप बनाम मानसिंह। घोड़ा चेतक अपनी स्वामिभक्ति के लिए प्रसिद्ध। दिवेर का युद्ध (1582) में मुगलों को हराया।

चित्तौड़गढ़ के तीन साके

प्रथम साका (1303): अलाउद्दीन खिलजी — रानी पद्मिनी का जौहर। द्वितीय (1534): गुजरात का बहादुर शाह। तृतीय (1568): अकबर का आक्रमण।

RAS Prelims में महत्व

हर वर्ष 2-3 प्रश्न। मुख्य तथ्य: हल्दीघाटी — 1576, मानसिंह बनाम प्रताप। कीर्ति स्तंभ — राणा कुम्भा, 1437। तीन साके — 1303, 1534, 1568। ट्रिक: बप्पा रावल से प्रताप तक — कालक्रम याद रखें।

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